आर्या परियोजना अन्तर्गत बकरी पालन पर सात दिवसीय प्रशिक्षण हुआ संपन्न
बून्दी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com>> कृषि विज्ञान केन्द्र श्योपुरिया बावड़ी बून्दी पर आर्या परियोजना के अन्तर्गत बकरी पालन पर सात दिवसीय (18 से 24 मार्च, 2025) प्रशिक्षण सम्पन्न हुआ। जिसमें बून्दी जिले के 35 युवा प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष प्रो. हरीश वर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को सम्बोधित करते हुए भारत सरकार द्वारा संचालित आर्या परियोजना की जानकारी देने के साथ ही प्रशिक्षण पश्चात् बकरी पालन को व्यवसाय के रुप में अपनाकर स्वरोजगार का साधन बनाने की सलाह दी।
प्रशिक्षण प्रभारी डाॅ घनश्याम मीना ने प्रशिक्षण के दौरान पशुपालक प्रशिक्षणार्थियों को बकरी में होने वाले रोगों की रोकथाम, बकरी की उत्तम नस्लें, गर्भावस्था के दौरान देखभाल, बकरियों में आहार व्यवस्था, बकरी का आवास, बकरियों के लिए आहार व चारा प्रबन्धन, टीकाकरण, चारे के लिए वृक्षारोपण, वर्षभर चारा उत्पादन, पशु आहार बनाने के बारे में जानकारी देने के साथ ही बकरी का वजन तौलना, डी वार्मिंग (कीड़े मारने की दवाई पिलाना), टीकाकरण का समय तथा टीकाकरण की विधि, खुर काटना, उम्र का निर्धारण, आहार बनाना, टेग लगाना, बकरी के दूध से उत्पाद जैसे पनीर, मावा बनाना, रिकाॅर्ड रखना, प्रसंस्करित उत्पाद जैसे मांस को पैक कर दूसरे स्थान पर भेजना संबंधित प्रायोगिक जानकारी दी।
इस दौरान पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार मीणा ने बकरियों में होने वाले विभिन्न रोगों तथा उपचार के बारे में बताया तथा बकरी पालन के विभिन्न तरीकों के बारे में जानकारी दी। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पशुओं में बंध्यता निवारण और बकरी पालन में कृत्रिम गर्भाधान के विषय पर जानकारी दी।
नाबार्ड के जिला महाप्रबंधक राजकुमार ने बैंकिंग, जमायें, ऋण लेने में आने वाली कठिनाइयों का समाधान करते हुए डिजिटल बैंकिंग व पशुपालन की राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की जानकारी दी।
वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता दीपक कुमार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना की जानकारी देते हुए बकरी पालन में उपयोग की जाने वाली दवाईयों और कृषि विज्ञान केन्द्र की बकरी पालन इकाई का भ्रमण कराकर प्रायोगिक जानकारी दी।
प्रशिक्षण के समापन पर आये हुए प्रतिभागियों को नाबार्ड के महाप्रबंधक राजकुमार द्वारा प्रमाण-पत्र का वितरण किया गया। प्रशिक्षण संचालन में उद्यान वैज्ञानिक इंदिरा यादव, विकास ताखर, चन्द्र प्रकाश श्रृंगी, लोकेश प्रजापत, दुर्गा सिंह सोलंकी, विजेन्द्र कुमार वर्मा एवं रामप्रसाद फामस ने सहयोग प्रदान किया।