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सभी शासकीय भवनों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगायें-डीएम

श्योपुर.Desk/ @www.rubarunews.com-कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट  अर्पित वर्मा ने कहा है कि जिले के सभी शासकीय भवनों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाये जाये। हॉस्टल, स्कूल, कॉलेज सहित अन्य शासकीय भवनो में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाये। इसके साथ ही जिले के विभिन्न ग्रामों एवं पंचायतो में स्थित मुक्तिधाम में प्लांटेंशन किया जाये। वे आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जल गंगा सवंर्धन अभियान के तहत आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। यह अभियान 30 मार्च से 30 जून तक संचालित होगा।
कलेक्टर एवं ंिजला मजिस्ट्रेट  अर्पित वर्मा ने निर्देश दिये कि अभियान के तहत संबंधित विभाग जल संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित अपनी-अपनी कार्य योजना तत्काल रूप से तैयार करें तथा कार्य योजना के अनुरूप कार्य कराये जाये। इसके साथ ही आमजन के बीच जल संरक्षण को लेकर जागरूकता उत्पन्न की जायें और जल संरक्षण के कार्यो में आमजन की सहभागिता सुनिश्चित की जायें। इसके लिए ग्रामों में कलश यात्राएं आयोजित की जायें, रैली निकाली जायें तथा जल चौपाल का आयोजन किया जायें, जिले के स्कूलो में जल संरक्षण विषय पर निबंध एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायें तथा चित्रकलां, पोस्टर प्रदर्शनी इत्यादि गतिविधियां संपन्न कराई जाये। पर ड्रॉप मोर क्रॉप अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा कृषको की स्प्रिकंलर सिस्टम प्रदान किये जाये तथा जल के उचित प्रबंधन हेतु सूक्ष्म सिंचाई के उपयोग पर कार्यशालाएं आयोजित की जायें। नहरों एवं माइनरों की साफ-सफाई तथा जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार आदि के कार्य किये जायें। नदियों और जलाशयों के पास स्थित मंदिरों तथा अन्य एतिहासिक महत्व की धरोहरों, कुए, बावडियांें की साफ-सफाई का कार्य किया जायें तथा वृक्षारोपण के कार्य किये जायें।
बैठक के दौरान सीईओ जिला पंचायत  अतेन्द्र सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
जल संरक्षण की दिशा में नवाचार, 85 रिचार्ज शाफ्ट बनाये जायेंगे
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा द्वारा जल संरक्षण की दिशा में नवाचार करते हुए जिले में 85 रिचार्ज शाफ्ट बनाये जाने के कार्यो को मंजूरी दी गई है। बैठक के दौरान उन्होने कहा कि रिचार्ज शाफ्ट, जल स्तर बढाने में अधिक उपयोगी है, यह कार्य उन क्षेत्रो में कराये जाये, जहां गर्मियों के समय जल स्तर काफी नीचे चला जाता है। उन्होने 85 कार्यो को मंजूरी देते हुए कार्य शुरू करने के निर्देश निर्माण एजेंसी पीएचई को दिये है। इसके तहत गर्मियों में पानी सूखने पर तालाबो में 100 फीट की गहराई तक बोर कराया जाता है तथा ऊपर डाया बनाकर पत्थर, बोल्डर आदि डाले जाते है, जिससे बारिश में तालाब भरने पर पानी जमीन के अंदर तक चला जाता है। इस तकनीक में बोर की गहराई मौके पर स्थित सतह के आधार पर की जाती है, जिससे पानी पथरीली सतह को पार कर बीच में पहुंच जाता है। इससे तेजी से जल स्तर में वृद्धि होती है।

Umesh Saxena

I am the chief editor of rubarunews.com