कामकाजी महिला तलवार की धार पर चल कर करती है समायोजन

बून्दी.KrishnaKantRathore/ @www.rubarunews.com- उमंग संस्थान द्वारा उमंग फ्री बीईंग मी” वाॅल कार्यक्रमों की श्रृंखला में सोमवार को कामकाजी महिलाओं की समस्याओं पर राष्ट्रीय डिजिटल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में गुजरात के शिक्षाविद सृष्टि फाउंडेशन के समन्वयक अनुपम डे तथा बेंगलोर की महिला समस्या विशेषज्ञ अल्पना दुबे विशिष्ठ अतिथि वक्ता रहे। महिला अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक भेरू प्रकाश नागर मुख्य वक्ता थे जबकि आयोजन की अध्यक्षता संस्थान अध्यक्ष सविता लौरी ने की।

मुख्य वक्ता के रूप में संकल्पना उमंग संस्थान की अध्यक्ष और कामकाजी महिलाओं की समस्याओं की शोधार्थी सविता लौरी ने प्रस्तुत की।

अतिथि वक्ता के रूप में बोलते हुए समाजसेवा कार्यों के साथ सक्रिय अनुपम डे ने कामकाजी महिलाओं के प्रति संवेदना, सहयोग और सम्मान के भाव की महत्ता का प्रतिपादन किया वहीं बैंगलोर की दुबे ने कामकाजी महिलाओं के समायोजन की दौहरी भूमिकाओं की विकटता का चित्रण प्रस्तुत किया।

तकनीकी सत्र का शुभारंभ कामकाजी महिलाओं की समस्याओं पर शोधरत लौरी ने अनुसंधान तथ्यों की जानकारी व संकल्पनाओं के साथ किया। उन्होंने कहा कि जीवन की विभिन्न भूमिकाओं के बीच समायोजन कामकाजी महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या है।कामकाजी महिला तलवार की धार पर चल कर अपने स्वतन्त्र अस्तित्व का निर्वहन करती है।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता नागर ने कहा कि विषम परिस्थियों मे भी कामकाजी महिलाएं दौहरी भूमिकाऐं निभाती है। उन्होंने महिला विकास में पुरातनपंथी सामाजिक धारणाओं की बाधाओं के साथ लैंगिक उत्पीड़न की समस्या व उसके समाधानों की जानकारी दी व विशाखा गाइडलाइन, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, मातृत्व लाभ, लैंगिक समानता और विधिक प्रावधानों पर भी चर्चा की। संगोष्ठी मे ज्ञानार्थ की संयोजिका शोभा कंवर ने विभिन्न उदाहरणों के द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न के बारे मे प्रकाश डाला, उम्मेहबीबा ने कामकाजी महिलाओं के पारिवारिक समयाभाव तथा राशि माहेश्वरी ने स्वास्थ्य, पोषण और स्वरोजगार उपविषय पर अपने विचारों को रखा। संगोष्ठी में शोधार्थियों, एनजीओ कार्यकर्ता, फ्री बीइंग मी कार्यक्रम व उमंग संस्थान के सदस्यों सहित ने सहभागिता की।संगोष्ठी का संचालन समन्वयक सर्वेश तिवारी ने किया तथा आभार सचिव कृष्ण कान्त राठौर ने प्रकट किया।