रेडक्रॉस सोसायटी के फंड का गलत इस्तेमाल न हो, तय नियमों से ही खर्च होगी राशि
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी बूंदी के कोष और उसके उपयोग से जुड़े मामले में सिविल न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सिविल न्यायाधीश तनु शर्मा ने सोसायटी सदस्य मुकेश दाधीच, रामनिवास मीना, महेश कुमार गुप्ता और संजय शर्मा द्वारा प्रस्तुत अस्थायी निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र को बहस के बाद आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है।
न्यायालय ने सख्त निर्देश दिए हैं कि रेडक्रॉस सोसायटी के कोषध्निधि का उपयोग उसके निर्धारित उद्देश्यों और उपनियमों के विपरीत बिल्कुल न किया जाए। किसी भी प्रकार की राशि खर्च करने से पहले नियमानुसार आवश्यक अनुमोदन और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना निधि से कोई भी व्यय या कार्य नहीं किया जाएगा।
सड़क किनारे सौंदर्याकरण पर उठाए सवाल
अदालत ने अपने आदेश में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की दीवार के सहारे शहर में कराए गए सौंदर्याकरण कार्य का विशेष उल्लेख किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह का कार्य रेडक्रॉस सोसायटी के तय कानूनी उद्देश्यों की श्रेणी में नहीं आता है।
इसके साथ ही, नए सदस्यों की मान्यता के मुद्दे पर न्यायालय ने टिप्पणी की कि भले ही अधिकृत व्यक्तियों द्वारा रसीदें जारी की गई हों, लेकिन सदस्यों की सूची राज्य शाखा को भेजने और वहां से अनुमोदन मिलने के समर्थन में सोसायटी की ओर से कोई दस्तावेज पेश नहीं किए गए।
व्यापक जनहित को माना सर्वोपरि
याचिकाकर्ता मुकेश दाधीच और सदस्य चंद्रप्रकाश दौराश्री के अनुसार, अदालत ने अपने आदेश में माना कि यदि मौजूदा कार्यकारिणी संविधान के खिलाफ जाकर संस्था के फंड का इस्तेमाल करती है, तो इससे केवल व्यक्तिगत अधिकार ही प्रभावित नहीं होते, बल्कि उन सभी लोगों के हित प्रभावित होते हैं जिनके कल्याण के लिए यह निधि एकत्रित की गई है। ऐसे मामलों में व्यापक जनहित को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। मामले में अगली सुनवाई (टंकणहट के लिए) 3 नवंबर 2026 की तारीख तय की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी अधिवक्ता अरविंद शर्मा, अजय नुवाल और राजकुमार गौतम ने की।
