ताजातरीनराजस्थान

बूंदी के पहाड़ों पर अब 12 माह चलेंगे झरने, वन विभाग ने शुरू की तैयारियां

बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बाघिन आरवीटी-8 की टेरेटरी बने कालदां के जंगलों में वन विभाग ने जल संरक्षण के काम शुरू करने का निर्णय लिया है। विभाग ने पहाड़ी चोटी पर स्थित जैवविविधता से स्मृद्ध कालदां माताजी के निकट आधा दर्जन जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए भेज दिए हैं। इसके तहत मोचड़ियां के देवनारायण से भूकी के नाले तक पक्के एनीकट बनाकर वर्षा जल का संचय किया जाएगा। ये सभी काम राज्य के दक्षिणी पूर्वी 13 जिलों के लिए चलाई जा रही राजस्थान वन एवं जैवविविधता विकास परियोजना के तहत कराए जाएंगे। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित इस 8 किलोमीटर नाले में 12 माह पानी की उपलब्धता रहती है और बाघ-बघेरों सहित अन्य वन्यजीवों के लिए प्रमुख आश्रयस्थल बना हुआ है। नाले पर आधा दर्जन प्राकृतिक जलस्रोत बने हुए है जिनमें हमेशा पानी भरा रहता है। अब इस नाले पर जगह जगह एनीकट निर्माण होने से भूमिगत जल स्तर बढ़ेगा तथा गर्मियों में भी झरने चलते रहेंगे। प्रस्तावित योजना में कालदां के निकट सगस जी का दह, कालदह, छोटा डबका, बड़ा डबका व भूकी जलप्रपात के ऊपर एनीकट बनाने के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। बूंदी रेंज से तैयार प्रस्तावों को स्वीकृति के लिए परियोजना कार्यालय जयपुर में भेज दिया गया है जहां से जल्दी ही बजट जारी होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि लंबे समय से इस क्षेत्र में बाघिन आरवीटी-8 की मौजूदगी है तथा पर्यावरण प्रेमी भी इस क्षेत्र को बाघों के अनुकूल बनाने की मांग कर रहे हैं। पिछले दिनों बूंदी के उपवन संरक्षक आलोकनाथ गुप्ता ने पूर्व जिला मानद वन्यजीव प्रतिपालक पृथ्वी सिंह राजावत के साथ दौरा कर इस क्षेत्र के विकास की योजना बनाई थी। अगले चरण में यहां ग्रासलैंड विकास व ट्रेक निर्माण की योजना है। उम्मीद है जल्दी ही इस क्षेत्र में बाघों का कुनबा बढ़ेगा तथा टाइगर सफारी की भी शुरुआत होगी।

इनका कहना है

जिले के कालदां क्षेत्र में आरएफबीडीपी परियोजना के तहत जल संरक्षण के प्रस्ताव भेजे गए हैं और स्वीकृति मिलते ही काम शुरू करवाने का प्रयास है।
आलोकनाथ गुप्ता
उपवन संरक्षक बूंदी