विकास के पथ पर अग्रसर बूंदी, 35.94 करोड़ से संवरेगा शहर
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के पांचवें चरण के तहत बूंदी शहर के समग्र विकास और कायाकल्प की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। शहर में कुल 35.94 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न महत्वपूर्ण विकास कार्य करवाए जाएंगे।
आरयूआईडीपी की अधिशाषी अभियंता दीप्ति पाटनी ने बताया कि इन कार्यों की विस्तृत जानकारी देने और स्थानीय लोगों से महत्वपूर्ण सुझाव व फीडबैक लेने के लिए 5 अगस्त को सुबह 10.30 बजे शहर के नगर परिषद भवन सभागार में “आरयूआईडीपी संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कंसल्टेशन मीटिंग में शहर के जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों, प्रबुद्धजनों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, मीडिया और अन्य स्टेकहोल्डर्स को आमंत्रित किया गया है।
शहर में इन कार्यों पर खर्च होंगे 35.94 करोड़ रुपये
अधिशाषी अभियंता ने बताया कि बूंदी शहर को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और स्मार्ट बनाने के लिए विभिन्न मदों में बजट आवंटित किया गया है। इसके तहत अपशिष्ट जल प्रबंधन का कार्य एशियन विकास बैंक (एडीबी) के वित्तपोषण से इस मद में 14.86 करोड़ रुपये के कार्य किए जाएंगे। कचरा निस्तारण और शहर को स्वच्छ बनाने के लिए 9.53 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ऐतिहासिक शहर बूंदी में पर्यटन, विरासत संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक करने के लिए 6.74 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने और बाढ़ प्रबंधन के लिए 4.81 करोड़ रुपये की लागत से कार्य करवाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना को एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) द्वारा 6009 करोड़ रुपये की लागत से ‘राजस्थान अरबन लिवेबिलिटी इम्प्रूवमेन्ट प्रोजेक्ट’ का वित्तपोषण किया जा रहा है। विश्व बैंक द्वारा 3492 करोड़ रुपये की लागत से ‘सस्टेनेबल अरबन ट्रॉन्सफॉरमेशन ऑफ राजस्थान एक्सेलरेटेड’ प्रोजेक्ट को वित्तीय मदद दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि विकसित राजस्थान-2047 की दिशा में बड़ा कदम आरयूआईडीपी के पंचम चरण का मुख्य उद्देश्य शहरों में अधोसंरचना के अंतराल को दूर करना, सेवा गुणवत्ता में सुधार करना और पर्यावरणीय निरंतरता को बढ़ावा देकर पर्यावरण के अनुकूल स्वस्थ समुदायों का विकास करना है। अपशिष्ट प्रबंधन के अलावा इसमें कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और शहरी गतिशीलता के कार्य भी आवश्यकतानुसार शामिल किए गए हैं। यह पूरी परियोजना सरकार के ‘विकसित भारत-2047’ और ‘विकसित राजस्थान-2047’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएगी।
