बाघ की तलाश में बाघिन आरवीटी-8, वन विभाग नहीं है गंभीर
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन कालदां व सूरज छतरी तक डेढ़ साल से भटक रही युवा बाघिन आरवीटी-8 को न तो जोड़ीदार मिला और न हीं किसी तरह के प्रे-बेस की व्यवस्था हो सकी। टाइगर रिजर्व के बफर जोन में पड़ने वाला यह क्षेत्र कहने को तो टाइगर रिजर्व घोषित हो गया है लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कोई राशी खर्च नहीं की गई है। बाघिन को वन विभाग ने अपने भरोसे छोड़ दिया है और कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए है। गौरतलब है कि रणथंभौर से लाकर बूंदी के जंगलों में छोड़ी गई यह बाघिन भीमलत तक विचरण कर रही है लेकिन वन विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं है। बाघिन बार बार हाइवे क्रॉस कर टाइगर हिल पर आ रही है लेकिन इसे जोड़ीदार नहीं मिल सका है। बाघ आरवीटी-1 जो बाघिन आरवीटी-3 के साथ रह रहा है वह इस बाघिन के साथ नहीं मिल सका है। लंबे समय से वन्यजीव प्रेमी कालदां क्षेत्र को बाघों के अनुकूल बनाने की मांग उठाते रहे हैं लेकिन वन विभाग अभी तक बूंदी में बाघों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं लग रहा है। करीब 4 साल की हो चुकी युवा बाघिन आरवीटी-8 तीन बार टाइगर हिल पर बाघ की तलाश में आ चुकी है लेकिन यह क्षेत्र बाघिन आरवीटी-3 की टेरेटरी होने से यह वापस कालदां इलाके में चली जाती है। एक तरफ चार साल से यह टाइगर रिजर्व नए शावकों को लेकर तरस रहा है वहीं वन विभाग की टाइगर रिजर्व के बफर जोन के प्रति बरती जा रही लापरवाही बूंदी के इको टूरिज्म के लिए भारी पड़ सकती है।
इनका कहना है
बाघिन आरवीटी-8 की नियमित मोनिटरिंग की जा रही है और कालदां के जंगलों को बाघों के अनुकूल बनाने के प्रयास कर रहे हैं। यदि आवश्यकता हुई तो कालदां क्षेत्र के जंगलों को कोर प्रबंधन में शामिल करेंगे।
— सुगनाराम जाट, फील्ड डायरेक्टर, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, बूंदी
