कोविड-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों का सहारा बनेगी राज्य सरकार

बून्दी KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com>> बाल श्रम कल्याण दिवस शनिवार को मनाया गया। इस अवसर पर बाल श्रम मुक्त राजस्थान विषय पर ऑनलाइन बैठक का आयोजन मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में किया गया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बाल श्रम उन्मुलन एवं बाल श्रम मुक्त राजस्थान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बाल श्रम कलंक है जो बच्चों से बचपन छीन लेता है। हमे इस समस्या की जड़ तक पहुंच कर इसका उन्मुलन करना होगा। राज्य सरकार बाल श्रम रोकने एवं बाल श्रमिकों के पुर्नवास में राजस्थान को माॅडल स्टेट बनाने की दिशा में प्रयासरत है। प्रदेश में बाल श्रम रोकथाम के लिए हाईपावर कमेटी बनाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए राज्य सरकार ने विशेष पैकेज जारी किया है। उन्होंने ऐसे बच्चों की प्रभावी माॅनिटरिंग करने के निर्देश दिए ताकि उन्हें बाल श्रम में नहीं झोंक दिया जाए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश के बच्चों एवं उनकी बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए सौ करोड़ रूपये का नेहरू बाल संरक्षण कोष बनाया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बताया कि कोविड महामारी से माता-पिता को खो चुके अनाथ बच्चों या एकल जीवित माता-पिता को खोने वाले बच्चों को 1 लाख रूपये का एक मुश्त अनुदान तत्काल सहायता के रूप में दिया जाएगा। 18 वर्ष पूरे होने तक ढाई हजार रूपये की राशि प्रतिमाह दी जाएगी। अनाथ बालक-बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होेने पर उसे 5 लाख रूपये एक मुश्त सहायता दी जाएगी। ऐसे बच्चों को बाहरवीं तक की पढ़ाई की सुविधा आवासीय विद्यालय अथवा छात्रावास के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

कोविड महामारी के कारण बेसहारा हुई काॅलेज में अध्ययनरत छात्राओं को सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। काॅलेज में पढ़ने वाले बेसहारा छात्रो को अम्बेडकर डीबीटी वाउचर योजना का लाभ मिलेगा। कोविड महामारी से प्रभावित निराश्रित युवाओं को मुख्यमत्री युवा सम्बल योजना के अन्तर्गत बेरोजगारी भत्ता देने में प्राथमिता दी जाएगी। इस महामारी के कारण अपने पति को खो चुकी विधवा महिलाओं को भी राज्य सरकार द्वारा एक मुश्त 1 लाख रूपये की सहायता अनुदान के रूप में दी जाएगी। साथ ही प्रतिमाह डेढ हजार रूपये पेंशन दी जाएगी। इन विधवाओं के बच्चों को निर्वाह के लिए एक हजार रूपये प्रतिमाह, स्कूल डेªस एवं किताबों के लिए दो हजार रूपये सालाना प्रति बच्चा दिया जाएगा।

आॅन लाइन बैठक में जिला कलेक्टर आशीष गुप्ता, पुलिस अधीक्षक शिवराज मीणा, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सीमा पोद्दार एवं सदस्य, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोरी लाल, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक जेपी चांवरिया, जिला बाल संरक्षण इकाई, किशोर न्याय बोर्ड, मानव तस्करी विरोधी इकाई के सदस्य मौजूद रहे।