मानव अधिकार हनन से जुड़े तीन मामलों में आयोग ने संज्ञान लिया, प्रतिवेदन मांगा

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने मानव अधिकार हनन से जुड़े तीन मामलों में संज्ञान लेकर संबंधितों से प्रतिवेदन मांगा है

पैंतीस गांवों के बीच एक अस्पताल महीने भर में एक भी टीका नहीं लगा

भोपाल/ दतिया @rubarunews.com >>>>>>>>
>>उज्जैन जिला मुख्यालय से 75 किमी दूर एक गांव मडावदा।कोरोना से निपटने के लिये यहां 35 गांवों के बीच एक अस्पताल बनाया, लेकिन सुविधा के नाम पर टेंट हाऊस की 6 गादियां जमीन पर बिछा दी। बाॅटल चढाने के लिये स्टैंण्ड तो रखे हैं, लेकिन आज तक उपयोग नहीं हुये है। इस गांव में बीते 15 दिनों में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन इनमें से एक भी कोरोना रिकार्ड में दर्ज नहीं है, क्यूंकि किसी की भी जांच ही नहीं हुई है। गांव के सरपंच ने बताया कि यहां बीते एक माह से कोरोना के टीके नहीं लगे। यहां से 28 किमी दूर बनबना गांव में भी ऐसे ही हाल हैं। ग्राम पंचायत में कोविड सेंटर बनाया गया है, लकिन कोई भर्ती होना नहीं चाहता। गांव में न नर्स है और न डाॅक्टर। अभी तक मात्र 70 लोगों को ही कोरोना के टीके लगे हैं। कुंडला गांव में 300 लोग सर्दी-खांसी से पीडित थे। किसी ने भी जांच नहीं कराई। एक बंगाली डाॅक्टर से इलाज करा रहे थे। इनमें से 5 की मौत के बाद वह भाग गया। एक प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित इस ग्राउंड रिपोर्ट पर त्वरित संज्ञान लेकर आयोग ने

अपर मुख्य सचिव म.प्र. शासन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मंत्रालय तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, उज्जैन से दो सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने इन अधिकारियों से यह भी पूछा है कि गांव में स्वास्थ्य की क्या योजना है ? गांव में कोरोना के टीके लगाने के लिये क्या इंतजाम किये गये हैं ? उपरोक्त समाचार वाले गांव में व्यक्तियों की मौतें किस कारण से हुईं ?

चिरायु का मैनेजर बोला यहां आयुष्मान कार्ड नहीं चलेगा, बाहर फेंको इसे..

भोपाल शहर के आयुष्मान कार्ड पर गरीबों को इलाज से दूर दुत्कार कर अस्पताल से बाहर धकेला जा रहा है। चिरायु अस्पताल में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां 2.5 से 3 लाख रूपये जमा कराने के बाद भी बेबस बेटे योगेश बलवानी से मां रूकमनी के इलाज के लिये रोजाना कभी एक लाख, तो कभी दो लाख मांगे गये। योगेश ने आयुष्मान कार्ड दिखाकर इलाज करने की बात कही, तो मैनेजर गौरव बजाज ने कार्ड लेने से इनकार कर दिया। मैनेजर बोला, वह किसी आदेश को नहीं जानता। उसने गार्ड से कहा कि इसे उठाकर बाहर फेंक दो। बता दें, बीते शनिवार शाम को योगेश की मां की मौत हो गई थी। बिना पैसे शव देने से अस्पताल ने इनकार कर दिया था। बडी मुश्किल से शव दिया। इस मामले में कलेक्टर भोपाल का कहना है कि मामला गंभीर है, जांच के बाद कडी कार्यवाही की जायेगी। सोशल मीडिया पर जो वीडियो चला है, उसकी जांच कराई जा रही है।

इस मामले में आयोग ने कमिश्नर, भोपाल संभाग, कलेक्टर एवं उप पुलिस महानिरीक्षक भोपाल से अगले एक सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने इन अधिकारियों से यह भी पूछा है कि अब तक चिरायु के मैनेजर के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई है ?

चोरी कबूल ली तो बर्फ पर खडाकर पीटा, मुंह में मिर्ची डाल दी

इन्दौर के कुमेडी के आॅक्सीजन प्लांट में* काम करने वाले 5 कर्मचारियों ने प्लांट के मालिक, उसकी बेटी, मैनेजर बाणगंगा थाने के दो पुलिस कर्मचारी और 15 लोगों के खिलाफ रात भर कमरा बंद कर उन्हें पीटने, बर्फ पर खडाकर मुंह में मिर्ची डालने के आरोप लगाये है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। दो पीडितों ने बताया कि वे दोनों बीआरजे कार्पाेरेशन प्लांट में काम करते है, जब से आॅक्सीजन रिफिल की जान लगी, तभी से चोरी शुरू हो गई थी। उन दोनों ने 12 सिलेंडर अपने परिचितों को दिये थे। हमने चोरी मान ली, पर इस बात का पता चलने पर 12 मई को उन्हें रात भर बंधक बनाकर पीटा गया।

इस मामले में आयोग ने पुलिस महानिरीक्षक, इन्दौर से प्रकरण में जो केस दर्ज किया है, उसकी उच्चाधिकारी से जांच करवाकर तथ्यात्मक प्रतिवेदन अगले सात दिवस में मांगा है।