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पाती लेखन प्रतियोगिता में रेखा शर्मा, उम्मे हबीबा, अनिल वर्मा और सानिया खान सम्मानित

बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- अंबेडकर भवन में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘डिजिटल युग में पत्र लेखन का महत्व’ एवं पुस्तक विमोचन समारोह में बूंदी की चयनित प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में तीन पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।
कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी, विचारक एवं लेखक डॉ. सूरज सिंह नेगी ने कहा कि पत्र लेखन के माध्यम से रिश्तों में बढ़ती दूरियों, सामाजिक संवेदनहीनता और आपसी संवाद की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।
रेखा शर्मा, उम्मे हबीबा और अनिल वर्मा सम्मानित
श्रेष्ठ पत्र लेखन एवं पत्र वाचन के लिए रेखा शर्मा और उम्मे हबीबा का चयन किया गया। वहीं, पाती लेखन अभियान में योगदान के लिए रेखा शर्मा, उम्मे हबीबा और अनिल वर्मा को ‘पाती प्रेरक सम्मान’ के तहत प्रमाण पत्र एवं पुस्तकें प्रदान की गईं। कार्यक्रम में में अखिल भारतीय पाती लेखन प्रतियोगिता के चयनित पत्रों पर आधारित ‘लिख दी चिट्ठिया माई को’, ‘पाती अपनों को मुहिम : एक अनवरत यात्रा’ तथा बाल लेखकों की पुस्तक ‘पेड़ हमारे जीवनदाता’ का विमोचन भी किया गया।
सानिया खान और कृतिन सनाढ्य को सांत्वना पुरस्कार
‘पेड़ हमारे जीवनदाता’ बाल लेखन प्रतियोगिता में बूंदी की श्री रघुनाथ अकैडमी की सानिया खान और लिटिल एंजेल स्कूल के कृतिन सनाढ्य को सांत्वना पुरस्कार के रूप में 500-500 रुपये, पुस्तक और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
विद्यार्थियों के पत्र पुस्तकों में प्रकाशित
‘पेड़ हमारे जीवनदाता’ में दोनों विद्यालयों के 10 विद्यार्थियों नैना मीणा, नेहल सैनी, अनन्या, हिमांशु, नेहल चोपदार, डॉली, अतफ जहाँ और दिव्यांश सहित अन्य विद्यार्थियों के पत्र प्रकाशित हुए हैं। हैं। ‘पाती अपनों को मुहिम : एक अनवरत यात्रा’ में रेखा शर्मा तथा विद्यार्थियों केशव और भावेश के पत्र प्रकाशित हुए हैं। पुस्तक में स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को भी पुस्तकें एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
2018 से अब तक लिखवाए गए करीब साढ़े तीन लाख पत्र
समारोह में जोधपुर, जयपुर, कोटा, बूंदी, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर, श्रीगंगानगर और दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों से साहित्यकार शामिल हुए। आयोजक डॉ. सूरज सिंह नेगी के अनुसार, वर्ष 2018 से अब तक 24 विषयों पर आयोजित पाती लेखन प्रतियोगिताओं के माध्यम से स्कूली बच्चों सहित लगभग साढ़े तीन लाख पत्र लिखवाए जा चुके हैं। चयनित पत्रों पर आधारित अधिकांश पुस्तकों का प्रकाशन भी हो चुका है।