ग्रामीण क्षेत्रों में 10 दिन में होगा 30 हजार से अधिक सोक, लिच और मैजिक पिट का निर्माण
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-गिरते भूजल स्तर को सुधारने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत आगामी 10 दिनों में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 30 हजार से अधिक सोक, लिच और मैजिक पिट का निर्माण करवाया जाएगा। इस पहल से न केवल गांवों की सफाई व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त होगी, बल्कि व्यर्थ बहने वाला गंदा पानी छनकर वापस धरती में समा सकेगा।
स्वच्छ भारत मिशन के जिला परियोजना समन्वयक निजामुद्दीन ने बताया कि वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सोखता गढ्ढों के निर्माण का कार्य आगामी 10 दिनों तक युद्धस्तर पर किया जाएगा। इसकी शुरूआत ऊर्जा राज्यमंत्री एवं बूंदी जिला प्रभारी मंत्री हीरालाल नागर ने सींता में आयोजित कार्यक्रम में की है। उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टर हरफूल सिंह यादव के निर्देशन में अभियान को सफल बनाने के लिए प्रतिदिन के लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं।
जिला समन्वयक ने बताया कि अगले 10 दिनों में जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में 165 सोक पिट तैयार किए जाएंगे। अभियान के तहत पूरे जिले में प्रतिदिन 3003 सोक पिट बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया हैं। उन्होंने बताया कि गांवों में घरों से निकलने वाला गंदा पानी नालियों के अभाव या जलभराव के कारण सीधे सड़कों पर बहता रहता है। इससे न केवल बीमारियां फैलने का डर रहता है, बल्कि कीचड़ से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। समस्या के स्थायी समाधान के रूप में यह सोक और मैजिक पिट मील का पत्थर साबित होंगे।
यह होंगे फायदे
जिला समन्वयक ने बताया कि सोखता गढ्ढों के निर्माण से सड़कों और नालियों में व्यर्थ बहने वाला गंदा पानी इन पिट्स के जरिए छनकर सीधे जमीन के अंदर जाएगा, जिससे भूमिगत जल स्तर में सुधार होगा। जलभराव की समस्या खत्म होने से मच्छर और जलजनित बीमारियों के पनपने का खतरा नहीं रहेगा। सड़कों पर पानी न बहने से गांव साफ-सुथरे दिखेंगे और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
बदलेगी ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर
जिला कलेक्टर हरफूल सिंह यादव ने बताया कि वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत करवाए जाने वाले इन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी। सोक, लिच और मैजिक पिट के निर्माण से एक ओर जहां पानी का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर ‘स्वच्छ गांव-स्वस्थ गांव’ की परिकल्पना भी साकार होगी।