मानसरोवर कॉलोनी में गूंजी गोवर्धन नाथ की महिमा, श्रद्धा से झूमे श्रद्धालु

“ईश्वर केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं, अहंकार के नहीं। गोवर्धन लीला हमें प्रकृति का सम्मान करना और पर्यावरण की रक्षा करना सिखाती है।” महाराजश्री ने बताया कि किस तरह क्रोधित होकर इंद्र ने ब्रज पर मूसलाधार बारिश शुरू कर दी थी, तब भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा और सभी ब्रजवासियों व पशु-पक्षियों की रक्षा कर इंद्र का मान-मर्दन किया था।
कथा के दौरान जैसे ही गोवर्धन पूजा का प्रसंग आया, पूरा पंडाल गिरिराज धरण की जय’ और ‘गोवर्धन महाराज की जय’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर भगवान को विशेष रूप से छप्पन भोग अर्पित किया गया। झांकी के दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने भजनों पर जमकर नृत्य किया और आनंद उठाया।
कार्यक्रम से जुड़े पूर्व भाजपा शहर अध्यक्ष महावीर खंगार ने बताया कि कथा के समापन कॉलोनी के गणमान्य नागरिकों ने भागवत आरती की। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला-पुरुष और क्षेत्रवासी उपस्थित रहे, जिन्होंने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ कमाया।
