मध्यान्ह भोजन कर्मियों की मांगों को लेकर आयुक्त को ज्ञापन
भोपाल.Desk/ @www.rubarunews.com-मध्यान्ह भोजन कर्मियों, सांझा चूल्हा में कार्यरत रसोइयों और स्वसहायता समूहों की विभिन्न समस्याओं को लेकर मध्यान्ह भोजन कर्मी यूनियन मध्य प्रदेश की प्रदेश महासचिव कामरेड किरण प्रकाश के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विकास भवन भोपाल में कमिश्नर दीपक आर्य से मिलकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चर्चा की*।
इस अवसर पर यूनियन ने रसोइयों को चार माह से लंबित मानदेय तथा समूहों को मध्यान्ह भोजन योजना की रुकी हुई राशि का भुगतान किए जाने सहित आठ सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
यूनियन के प्रांतीय महासचिव किरण प्रकाश ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न शासकीय शिक्षण संस्थानों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में कार्यरत महिला कर्मियों और रसोइयों को लंबे समय से भुगतान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर रसोइयों का मानदेय समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। इसी प्रकार मध्यान्ह भोजन संचालन करने वाले समूहों की राशि भी लंबित है। प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान कमिश्नर दीपक आर्य ने बताया कि सिस्टम में बदलाव के कारण रसोइयों और समूहों की राशि भुगतान प्रक्रिया में रुकी हुई है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से 10 दिन का समय मांगा और आश्वासन दिया कि इसके बाद सभी जिलों में रसोइयों के मानदेय तथा समूहों की लंबित राशि जमा किए जाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।
पहली मांग में रसोइयों का मानदेय प्रत्येक माह निर्धारित तिथि पर दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि कर्मियों को बार-बार भुगतान के लिए परेशान न होना पड़े। दूसरी मांग में रसोइयों के काम के घंटे निर्धारित करने तथा उनके कार्य के अनुरूप कलेक्टर रेट पर मानदेय दिए जाने की मांग की गई है। तीसरी मांग में ड्रेस कोड लागू करते हुए उड़ीसा सरकार की तर्ज पर प्रत्येक वर्ष ड्रेस खरीदने के लिए 500 रुपये की राशि दिए जाने की मांग की गई है। चौथी मांग में प्रदेश के प्रत्येक जिले में शिकायत निवारण समितियों का गठन किए जाने की बात कही गई है। यूनियन का कहना है कि ऐसी समितियां गठित होने से रसोइयों के साथ होने वाली समस्याओं एवं परेशानियों का स्थानीय स्तर पर निराकरण किया जा सकेगा।पांचवीं मांग में शासकीय शिक्षण संस्थानों में कार्यरत रसोइयों को 62 वर्ष की आयु तक कार्य से नहीं हटाए जाने की मांग की गई है। छठी मांग में समय से पूर्व कार्य से निकाली गई रसोइयों को पुनः बहाल किए जाने की मांग उठाई गई है। यूनियन ने कहा कि कई मामलों में रसोइयों को निर्धारित अवधि से पहले कार्य से बाहर कर दिया गया है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ है। सातवीं मांग में शिक्षा संस्थानों में कार्यरत रसोइयों को सक्षम जिला अधिकारी द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाने की मांग की गई है, ताकि उनकी नियुक्ति एवं कार्य से संबंधित स्थिति स्पष्ट और व्यवस्थित हो सके। आठवीं मांग में स्व-सहायता समूहों द्वारा कार्यरत रसोइयों को हटाकर उनकी जगह दूसरी महिलाओं को लगाए जाने की कथित मनमानी पर रोक लगाने की मांग की गई है। यूनियन ने इस व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
लंबित भुगतान सहित अन्य समस्याओं पर चिंता जताते हुए कामरेड किरण प्रकाश ने कहा कि मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में कार्यरत रसोइए विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने से लेकर भोजन वितरण तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, समूहों की राशि अटकने से मध्यान्ह भोजन व्यवस्था के संचालन में भी परेशानियां उत्पन्न होती हैं।यूनियन ने मांग की कि रसोइयों और समूहों के लंबित भुगतान का स्थायी समाधान किया जाए तथा भविष्य में मानदेय और योजना की राशि समय पर जारी करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। कमिश्नर श्री दीपक आर्य ने सभी मांगों पर विचार कर 10 दिन में लंबित भुगतान प्रकिया शुरू करने का आश्वासन दिया है जिसके बाद यूनियन ने आशा जताई है कि प्रदेश भर के मध्यान्ह भोजन समूहों, मध्यान्ह भोजन कर्मियों, सांझा चूल्हा रसोइयों को जल्द राहत मिलेगी। साथ ही किरण प्रकाश ने कहा कि यूनियन रसोइयों और समूहों की आवाज लगातार उठाता रहेगा और यदि शासन द्वारा समाधान नहीं होता है तो आवश्यकता पड़ने पर यूनियन द्वारा भोपाल में राज्य स्तरीय प्रदर्शन के आयोजन को लेकर रणनीति बनाई जाएगी।
