रक्षाबंधन पर रंग बिरंगी आकर्षक राखियों से सजा बाजार
बून्दी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- भाई बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार इस बार शुक्रवार 28 अगस्त को हर्ष और उल्लास से मनाया जाएगा। बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी को लेकर खरीदारी में जुटी हुई है, तो बूंदी शहर में भी राखी बाजार सज गया है जहां पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए खरीदारी करने पहुंच रही है। इसी को लेकर बूंदी में राखी बाजार सजाने के साथ ही महिलाएं युवक युवतियां परिवारजन सभी राखी की खरीदारी करने बाजार में पहुच रही हैं। भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने को लेकर राखी खरीदने राखी बाजार जो की बूंदी शहर के चैगान गेट पर लगा हुआ है और 12 महीने इस रक्षाबंधन के त्यौहार का इंतजार करने वाली बहने अपने भाइयों की कलाई के लिए सुंदर और महंगी राखियां भी खरीद रही है। बूंदी में राखी की अगर बात करें तो इस बार डायमंड वाली राखियां, छोटी राखियां ,बच्चों के लिए डोरेमोन ,कार्टून और लाइट वाली राखियां दुकानों पर बिकने के लिए आई हुई है। बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए अपनी पसंद की अच्छी से अच्छी राखी खरीद रही है, ताकि भाई की कलाई पर वह राखी अच्छी भी लगे। बहने बड़ी खुशी से रक्षाबंधन के इस पर्व को सेलिब्रेट करने की तैयारी को लेकर खरीदारी करने में जुटी हुई है। नारियल मिठाई या राखी फिर अन्य सभी की खरीदारी करने के लिए बाजार में पहुंच रही है तभी तो बाजार में खरीदारी को लेकर रक्षाबंधन के त्यौहार को देखते हुए भीड़भाड़ का नजारा देखने को मिल रहा हैं।
27 वर्षों बाद भद्रा मुक्त रक्षाबंधन
रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करते हुए उसकी कलाई पर राखी बांधती है और भाई अपनी बहन को जीवन भर उसकी रक्षा करने का वचन देता है, जबकि गुरु अपने शिष्यों और पुरोहित अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद देते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम जगन्नाथपुरा के अनुसार 27 वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। इसके साथ ही इस बार रक्षाबंधन पर पांच शुभ योगों, सुकर्मा योग, बुधादित्य योग, उभयचरी योग, सर्वार्थ सिद्धि योग तथा त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। जिससे यह पर्व धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत विशेष माना जा रहा है। वहीं भद्रा काल नहीं होने के कारण पूरे दिन रक्षा सूत्र बांधने में कोई बाधा नहीं रहेगी।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम जगन्नाथपुरा के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह लगभग 9.45 बजे तक रहेगी। भद्रा काल 27 अगस्त की सुबह 9.08 बजे शुरू होकर रात 9.32 बजे समाप्त हो जायेगा। भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त होने के कारण इस बार बहनों को राखी बांधने के लिए सुबह से ही पर्याप्त समय मिलेगा। उदय व्यापिनी सिद्धांत के अनुसार पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा। शुक्रवार को सुबह 9.48 बजे तक पूर्णिमा तिथि रहने के कारण इस अवधि को विशेष शुभ माना गया है, दोपहर 12.29 बजे से 2.04 बजे तक तथा सांय 5.14 से 6.50 बजे तक शुभ मुहूर्त में रक्षा सूत्र बांधे जा सकते है। इस दौरान 28 अगस्त को दिन के 10.31 बजे से दोपहर 12.07 बजे तक राहुकाल रहने से शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में बहनों को इस समय राखी बांधने से बचना चाहिए।
श्रावणी उपाकर्म में बदलेंगे यज्ञोपवीत
श्रावणी पूर्णिमा पर बूंदीस्थ ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र परिषद के तत्वावधान में श्रावणी उपाकर्म का आयोजन माधव की पेडिया पर शुक्रवार को प्रातः 9 बजे किया जायेगा। परिषद के मंत्री पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर प्रायश्चित संकल्प, दशविध स्नान, देव एवं ऋषि तर्पण, वेद पूजन किया जायेगा। इस वैदिक आयोजन में विप्र गण नूतन यज्ञोपवीत धारण कर विश्व शांति, मानव कल्याण एवं अखिल विश्व के अभ्युदय की कामना के लिए भद्र सूक्त आदि का पाठ करेंगे।
रोडवेज बसों में महिलाएं कर सकेंगी मुफ्त यात्रा
राजस्थान रोडवेज ने हर साल की तरह इस साल भी रक्षाबंधन पर महिलाओं और बालिकाओं को बसों में मुफ्त यात्रा की सौगात दी है। रोडवेज प्रबंधक घनष्याम गौड़ ने बताया कि रक्षाबंधन के मौके पर दो दिन 28 और 29 अगसत को रोडवेज की साधारण और एक्सप्रेस बसों में महिलाएं-बालिकाएं मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। महिलाओं को मुफ्त यात्रा के लिए जीरो राशि के टिकट दिए जाएंगे। 28 और 29 अगस्त को यात्रा करने वाली महिलाएं पहले से सीट का रिजर्वेशन भी करा सकेंगी। इससे रक्षाबंधन पर बढ़ने वाली भीड़ के दौरान सीट को लेकर परेशानी से बचा जा सकेगा। फ्री सफर की सुविधा रोडवेज की सामान्य बसों में मिलेगी। एसी वोल्वो और अखिल भारतीय परमिट पर चलने वाली बसों में महिलाओं को सामान्य किराया देना होगा। मुफ्त यात्रा की सुविधा केवल राजस्थान की सीमा के अंदर लागू होगी। राजस्थान से दूसरे राज्यों में जाने वाली बसों में राज्य की सीमा से बाहर की यात्रा का किराया देना होगा। राजस्थान की सीमा के अंदर सफर करने पर पात्र महिलाओं और बालिकाओं से किराया नहीं लिया जाएगा।
