प्रख्यात रंगकर्मी नीरज कुंदेरा को तत्काल रिहा करें, मामले की उच्च स्तरीय जांच हो: इप्टा

  भोपाल/छतरपुर.Desk/ @www.rubarunews.com>> भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) और प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेसं) ने प्रख्यात रंगकर्मी और कला आंदोलन के प्रमुख स्तंभ नीरज कुंदेर की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाए हैं। इप्टा के प्रदेश महासचिव शिवेंद्र शुक्ला और प्रलेसं के महासचिव शैलेंद्र शैली ने कहा है कि नीरज कुंदेर को तत्काल रिहा किया जाए और मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कलाकारों को प्रताड़ित करने और कला आंदोलन के प्रति प्रशासन का रवैया स्वस्थ समाज के लिए अच्छा संदेश नहीं देता है। नीरज जी पर लगाए गए आरोप की धाराओं में उन्हें तत्काल जमानत और मुचलके पर रिहा किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा न करके उन्हें जेल भेजा गया।  उन्होंने कहा कि  कुंदेर जी को तत्काल रिहा न किया गया तो इप्टा और अन्य कला संस्कृति से जुड़े संगठन प्रदेश व्यापी आंदोलन करेंगे।

क्या है मामला

प्रख्यात रंगकर्मी और कला आंदोलन के प्रमुख स्तंभ नीरज कुंदेर को सीधी पुलिस ने फेक आई डी के आरोप में गिरफ्तार किया है। उन्हें सोची समझी साजिश के तहत शनिवार देर शाम गिरफ्तार किया गया, ताकि वे जमानत न करा सकें। यही नहीं, पुलिस के इस कृत्य का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे  इंद्रवती नाट्य समिति के वरिष्ठ रंगकर्मी रोशनी प्रसाद मिश्र, नरेंद्र बहादुर सिंह, शिवा कुंदेर, रजनीश जायसवाल सहित करीब 10 – 15 कलाकारों को प्रतिबंधक धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।

सत्तारूढ़ नेता और विधायकों की साजिश: शिवेंद्र

इप्टा के महासचिव शिवेंद्र शुक्ला ने कहा कि नीरज जेल गए क्योंकि सत्तारूढ़ दल के नेता, विधायक यही चाहते थे। सीधी पुलिस की यह कार्यवाही कई सवाल खड़े करती है। नीरज कुंदेर के विरुद्ध फेक आईडी के आरोप की प्रॉपर जांच के बाद ही गिरफ्तारी होनी चाहिए थी, लेकिन पुलिस आरोपी और उसके वकील को संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाई?

उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिना किसी दुर्भावना के जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए था, वे प्रतिष्ठित रंगकर्मी हैं आदतन अपराधी नहीं। लेकिन गिरफ्तारी के लिए जानबूझ कर शनिवार का दिन चुना गया और ऑफिस अवधि खत्म होने के ऐन पूर्व में सारी कार्यवाही की गई ताकि वे जमानत की औपचारिकता पूर्ण नही कर पायें और उन्हें जेल जाना पड़े।

शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार: शैली

प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव शैलेंद्र शैली ने कहा कि शासन-प्रशासन के किसी भी निर्णय या कृत्य का शांतिपूर्ण संवैधानिक तरीके से विरोध करना किसी भी नागरिक का लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है। बावजूद इसके पुलिस ने शांतिपूर्ण संवैधानिक तरीके से नीरज कुंदेर की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे रंगकर्मियों को गिरफ्तार किया है। जो पुलिस की दुर्भावना का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि हैरान करने वाली बात ये हैं कि पुलिस ने क्रोनिक किडनी पेशेंट नरेंद्र बहादुर की भी गिरफ्तारी की जबकि वे जीवन रक्षक दवाओं पर निर्भर हैं। उन्हें बिना दवा और भोजन के रख गया। सुबह 7.30 बजे उनकी पत्नी रंगकर्मी और अभिनेत्री करुणा सिंह चौहान उनसे मिलने गई तो उन्हें मिलने भी नही दिया गया। बाद में दोपहर में उन्हें दवा और परहेजी भोजन (बिना तेल-मसाले और नमक वाला) देने की छूट दी गई।ज्ञात हो कि नरेंद्र बहादुर लोक कला व संस्कृति के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम है।उन्होंने गांवों में घूमकर 10 हज़ार से भी ज़्यादा लोक गीतों का संकलन किया है।

इप्टा और प्रलेसं की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि रंगकर्मियों और कलाकारों से  राजनीतिक प्रतिशोध लेने के लिए पुलिस का इस्तेमाल निंदनीय है। नीरज के परिजनों का कहना है नीरज के ऊपर लगाया गया आरोप पूरी तरह से झूठा और निराधार है। नरेंद्र बहादुर सिंह की पत्नी जो खुद भी थियेटर आर्टिस्ट है का कहना है कि “पुलिस और जेल हमारा हौसला नहीं तोड़ सकती, हम अपना प्रतिरोध जारी रखेंगे।

दमन और उत्पीड़न बंद हो

भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) और प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेसं) का कहना है  कि हम पुलिस कार्यवाही की निंदा करते हैं और पुलिस प्रशासन और सरकार से कहना चाहते हैं कि वैचारिक असहमति और शांतिपूर्ण प्रतिरोध लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है। सरकार और उसके नुमाइंदे उसके प्रति उदार और सहिष्णु बनें तथा कलाकारों का दमन और उत्पीड़न बन्द करें।