रामचंद्रजी को हनुमानजी ने अपने दु:ख कभी नहीं बताए

दतिया @rubarunews.com>>>>>>>   हनुमान ने रामचंद्र जी के संकट दूर किए इसलिए वह संकट मोचन कहलाए। रामचंद्र जी को हनुमान ने अपने दु:ख कभी नहीं बताए। इसी कारण आज संकट मोचन मंदिर अधिक बने हुए हैं। हमें भी संकट मोचन बनना है तो भगवान व गुरु के उपसर्ग दूर करने का प्रयास करना चाहिए। अपना दु:खड़ा उनको नहीं रोना चाहिए। *यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने गुरुवार को सोनागिर में धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए।

 

मुनिश्री ने कहा कि शादी होने के बाद हमें नियम लेना चाहिए कि मैं अपनी मां के हाथ से बना भोजन ग्रहण नहीं करूंगा और दूसरा नियम लेना चाहिए कि मां-पिता को भोजन कराके ही भोजन ग्रहण करूंगा। तभी हमारा कल्याण होगा। एक मां-बाप दस बेटों व बेटियों को पालन लेते हैं लेकिन दस बेटे-बेटियां एक मां-बाप को नहीं खुश रख पाते ऐसे लोग जिंदगी भर दु:खी रहते हैं। बड़े होने के बाद जो लोग अपने मां-बाप की संपत्ति पाने का ध्यान रखता है, पाने की लालसा रखता है वह कुत्ते के समान है।

 

*हमें दुर्योधन की नीति नहीं रखनी चाहिए*।
मुनिश्री ने कहा कि भगवान तीन घंटे की लाईन में लगने के बाद मिले तो भी परिणामों को खराब मत करना। क्योंकि कबीर ने कहा कि अगर शीश चढ़ाने के बाद भी देव व गुरु मिले तो भी कम है। हमें दुर्योधन की नीति नहीं रखनी चाहिए।

 

*आदमी धर्म की क्रिया सेम्पल में कर रहा है।*
मुनिश्री ने कहाकि आज आदमी धर्म की क्रिया सेम्पल में कर रहा है। मन में विचार रहता है कि धर्म करने से कल्याण होगा या नहीं। जिस कारण वह एक नहीं सैकड़ों देवी-देवताओं को पूजता है। जबकि कहा है एक को साधे सब सधे-सब साधे सब जाए अर्थात् हमारा आराध्य एक ही होना चाहिए। देव-शास्त्र-गुरु हमारा एक हो। हमारा गार्जियन एक हो। उस पर आस्था रखो कल्याण निश्चित होगा।

 

*ग्वालियर में मुनिश्री विहर्ष सागर को भक्तामर महा विधान के कार्यक्रम की पत्रिका भेंट की*

 

दतिया। चातुर्मास के समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि ग्वालियर चातुर्मास कर रहे राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ससंघ को आयोजन समिति के महेंद्र जैन, सुनील लोहिया, प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने आचार्यश्री धर्मभूषण सागर महाराज एवं क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज जी के सानिध्य में जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर तीर्थ में 22 नम्वर को 108 मंडली भक्तामर विधान एवं पिच्छी परिवर्तन समारोह कार्यक्रम की आमंत्रित पत्रिका भेंट की।