आरटीओ दफ्तर में बिना दलालों के नहीं होता काम, ड्राइबिंग लाइसेंस व अन्य दस्तावेज बनाने युवा लगा रहे महिनों चक्कर, पंजीयन शाखा में लटक रहा ताला

भिण्ड। शहर के परिवहन कार्यालय में बिना दलालों के काम नहीं होता है। यदि यहां आपको अपना कोई काम करवाना है तो दलाल की मदद तो लेनी ही होगी और यदि आप दलालोंं को पसंद नहीं करते हैं तो अपने काम के लिए महिनों चक्कर लगाने के लिए तैयार हो जाएं, यह कारनामा शहर के आरटीओ दफ्तर में धड़ल्ले से चल रहा है वर्षो से यहां पर दलाल राज हावी है इसलिए कर्मचारियों व दलालों में फर्क नजर नहीं आता है वैसे तो दलाल आरटीओ कार्यालय के बाहर बैठे देखे जाते थे, लेकिन इन दिनों दलालों ने कार्यालय के अंदर अपना अड्डा बना लिया है। कार्यालय में काम करवाने के लिए जब कोई पहुंचता है तो वह फर्क नहीं पता कर पाता है कि जिससे वह बात कर रहा है वह आरटीओ कर्मचारी है या दलाल। कारण है दलाल आरटीओ अधिकारी के आसपास फाइलों पर दस्तक कराते हुए पाए जाते है। यही से वे अपने शिकार की तलाश भी कर लेते हैं। जब से जिले में आरटीओ अधिकारी अनुराग शुक्ला पदस्थ हुए है तब से कार्यालय में दलाल राज ज्यादा हावी हो गया है बिना घूसखोरी के कोई भी काम नहीं हो रहा है, श्री शुक्ला को दफ्तर में आज तक किसी ने भी बैठा हुआ नहीं देखा है जब भी कोई व्यक्ति अपना ड्राइबिंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, बीमा, परमिट आदि दस्तावेज बनवाने के लिए जाता है तो रास्ते में दलाल घेर लेते हैं। आम नागरिक आरटीओ दफ्तर में खुलेआम चल रही घूसखोरी की शिकायत करने के लिए श्री शुक्ला को फोन लगाते हैं तो हमेशा उनका नम्बर व्यस्त जाता है या फिर उठाने में रुचि नहीं लेते हैं। रिपोटर ने खबर के संबंध में जानकारी लेते के लिए श्री शुक्ला को कईबार फोन लगाया तो उन्होंने उठाना मुनासिब नहीं समझा, इतना नहीं वापस रिर्टन भी नहीं किया। अभी हमारे ऊपर से कोरोना महामारी बीमारी टली नहीं है बावजूद भी आरटीओर दफ्तर में लापरवाही देखने को मिल रही है यहां पर बिना मास्क व सोशल डिस्टेसिंग सैकड़ों युवा लाइन में लगे हुए और संक्रमित होने का किसी को डर नहीं है।
दफ्तर खुलते ही दलालों की पहुंचती टेबिल पर
हाथ में कागजों की फाइल लिए दलाल दफ्तर खुलते ही फाइलें टेबल पर पहुंचनी शुरू हो जाती है। इनकी हनक सिर्फ इसी बात से लगाई जा सकती है अफ्सर कोई भी हो, ये बेधडक़ उनके कक्ष में घुसकर फाइल टेबल पर रख देते हैं। आम इंसान घंटों बाहर बैठकर अधिकारी से मिलने का इंतजार करता रहता है, लेकिन दलालों को किसी तरह की इजाजत तक पूछने की जरूरत नहीं। अपने धंधे के साथ सरकारी कामों में भी दलालों का बोलबाला है। अफ्सरों के कमरों से सरकारी फाइलें दूसरे कक्षों में ले जाना हो या लिपिकीय कार्य में कर्मियों की मदद। दलाल हर जगह मौजूद दिखेंगे। जहां दलालों का ही बोलबाला हो तो आप खुद समझ लिजिए कि बगैर चढ़ावा चढ़ाए काम कैसे होगा।
कर्मचारी नहीं करते सीधे मुंहबात
जिले के आरटीओ दफ्तर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाना, रजिस्ट्रेशन कराना हो या परमिटए टैक्स प्रक्रिया। इधर से उधर बस धक्के खाते रहो। मदद करना तो बहुत दूर, कोई अधिकारी या कर्मचारी सीधे मुंह बात तक नहीं करते। चाहे धक्के खाते हुए आपको एक दिन हो जाए या हफ्ताभर गुजर जाए। हां अगर आपने जेब से चंद नोट की पत्तियां निकाल ली तो फिर कोई टेंशन नहीं। महज चंद मिनट में काम पूरा। टेंशन दूर करने के लिए मौजूद हैं दलाल। दलाल ही चपरासी का काम संभाल रहे और यही बाबू का भी काम।
कोरोना महामारी में बरती जा रही लापरवाही
आरटीओ दफ्तर में ड्राइबिंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, परमिट, बीमा आदि दस्तावेज बनाने के लिए इन दिनों सैकडों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड रही है, लेकिन किसी तरह का कोरोना महामारी से बचाव हेतु पालन नहीं किया जा रहा है यहां पर सुबह से शाम तक भीड़ देखी जा सकती है कोई भी मास्क नहीं लगा रहा है सोशल डिस्टेसिंग की जमकर धज्जियां उडाई जा रही हैं जब आरटीओ अधिकारी ही लापरवाह नजर आ रहे है तो पालन कौन करायेगा।