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राजस्थान में बनेगी भेड़िया संरक्षण योजना, हाड़ौती के जंगलों से हुई शुरुआत

बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- राजस्थान में संकटग्रस्त प्रजाति में शामिल भेड़ियों के संरक्षण की योजना पर वन विभाग ने काम शुरु किया है। राज्य में हाड़ौती के रामगढ़ विषधारी, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व व अन्य जंगलों में संकटग्रस्त भेड़ियों की उपस्थिति व फैलाव के स्थानों को चिह्नित करने का सर्वे शुरू कर दिया है। वन विभाग की वन्यजीव शाखा ने कोटा संभाग के सभी फील्ड स्टाफ, शोधकर्ताओं, वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, छात्रों, संरक्षणविदों व ग्रामीणों से भेड़ियों से जुड़ी जानकारी साझा करने का अनुरोध किया है। इसके लिए वन विभाग ने एक गूगल फॉर्म भी जारी किया है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति भेड़ियों की मौजूदगी की सूचना दे सकता है। गौरतलब है कि राजस्थान में भेड़ियों की संख्या एक हजार से भी कम रह गई है लेकिन हाड़ौती क्षेत्र में भेड़ियों की उपस्थिति अच्छी संख्या में मौजूद हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। वन विभाग सर्वे के माध्यम से भेड़ियों के फैलाव वाले इलाकों को मैप करने करने व संरक्षण की योजना पर काम कर रहा है। दोनों टाइगर रिजर्व के कोर व बफर क्षेत्रों में फोटोट्रेप कैमरों से भी भेड़ियों की मॉनिटरिंग कर रहा है।
भेड़ियों के आश्रयस्थल बने भीमलत व बरड़ के जंगल
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के जैवविविधता से समृद्ध भीमलत व बांका भोपतपुरा के बफर क्षेत्र में दो साल से भेड़िया संरक्षण की योजना पर काम चल रहा है। टाइगर रिजर्व की नवगठित भोपतपुरा रेंज में उपरमाल के पठार पर 800 हेक्टेयर के विशाल वन क्षेत्र को भेड़ियों व गिद्धों के संरक्षण क्षेत्र के रूप में चिह्नित कर काम शुरू कर दिये हैं। टाइगर रिजर्व के कोर प्रशासन ने बफर जोन में आने वाले इन महत्वपूर्ण जंगलों को बाघों के साथ साथ अन्य वन्यजीवों के अनुकूल बनाने की पूरी तैयारी कर ली है तथा उम्मीद है कि जल्दी ही इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे। योजना के तहत टाइगर रिजर्व क्षेत्र की भोपातपुरा रेंज में भीलवाड़ा जिले के बांका, भोपातपुरा, जलिन्द्री, सुंठी, भड़क्या माताजी का नाला, सीताकुंड तथा बून्दी जिले के भीमलत व मुंदेड़ वन खंड को इनके संरक्षण के लिए सबसे अच्छे जंगल माना गया है। यहां पर भीमलत की प्राकृतिक वादियां, बाणगंगा नदी के पास भाला का जंगल, भोपातपुरा के पास भड़क्या माताजी का जंगल व गरड़दा व अभयपुरा बांधो के बीच मुंदेड़ का पठार भेड़ियों व गिद्धों के संरक्षण स्थल के रूप में विकसित किए गए हैं। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बूंदी जिले के जवाहर सागर अभयारण्य में भी भेड़ियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यहां पर वन विभाग की मेहनत का परिणाम भी नजर आने लगा है तथा भेड़ियों के झुंड नजर आने लगे हैं। जल्दी ही भीमलत व गराड़िया महादेव क्षेत्र में टाइगर सफारी भी शुरू होने की संभावना है जिससे यहां आने वाले पर्यटक बाघों के साथ साथ भेड़ियों व गिद्धों का भी दीदार कर सकेंगे। अब पूरे हाड़ौती संभाग में विभाग ने इस महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है जिसमें ग्रासलैंड के साथ साथ वन्यजीवों की संख्या बढ़ेगी व इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
राजस्थान में बचे केवल 771 भेड़िए
राजस्थान वन विभाग की 21 जुलाई 2024 की आधिकारिक वन्यजीव गणना में भेड़ियों की संख्या मात्र 771 दर्ज हुई है जिनमें संरक्षित वन क्षेत्र में 299 जबकि अन्य इलाकों में 472 दर्ज हुए हैं जो चिंता का विषय है। हालांकि यह गणना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सटीक नहीं है लेकिन आंकड़े इस प्रजाति के संकटग्रस्त होने के संकेत देते हैं। भेड़ियों की राजस्थान में घटती संख्या के कारण इसे वन्यजीव अधिनियम के शेड्यूल प्रथम में शामिल किया गया है।
इनका कहना है
हाड़ौती क्षेत्र के जंगलों में भेड़ियों के वास स्थानों, उनकी वास्तविक संख्या, उनके प्रे बेस की उपलब्धता व व्यवहार का अध्ययन करने के लिए आमजन व वन्यजीव प्रेमियों के माध्यम से एक व्यापक सर्वे शुरू किया है। सर्वे से प्राप्त परिणाम व वन विभाग के डाटा के आधार पर भेड़ियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संरक्षण व संवर्धन के लिए  संरक्षण योजना तैयार की जाएगी।

– टी मोहन राज, वन संरक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व-कोटा