रणथंभौर की आक्रामक बाघिन बूंदी के जंगलों में हुई शांत, एक साल पहले आज ही के दिन किया था युवा बाघिन को जंगल में आजाद
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में एक साल पहले 15 जुलाई दोपहर को मेज नदी किनारे बने बजाल्या एनक्लोजर से युवा बाघिन को खुले जंगल में छोड़ा गया था। आरवीटी 8 के नाम से पहचानी जाने वाली इस बाघिन ने आजाद होते ही मृत बाघिन आरवीटी-2 की बेटियों आरवीटी 5 व 6 की टेरेटरी से निकलकर रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र छोड़ दिया था यह बाघिन बफर जोन में बूंदी शहर से सटी टाइगर हिल पर दो-तीन महीने रही लेकिन यहां पहले से मौजूद बाघिन आरवीटी-3 ने इसको टिकने नहीं दिया। एक महीने तक बाघिन का मूवमेंट बूंदी शहर की तलहटी में भी होने लगा तथा एक दो बार तो यह नैनवां रोड़ व राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर भी आ गई थी।
वन विभाग ने इसके आबादी में संभावित प्रवेश को रोकने के लिए ट्रेंकुलाइज करने की भी तैयारी कर ली थी। बाद में यह बाघिन राष्ट्रीय राजमार्ग 12 को पार कर कालदां के जंगलों में पहुंच गई। बीच बीच में बाघिन भीमलत के जंगलों तक जाती रहती है तथा कॉरिडोर की बाधाएं खत्म हो तो यह मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व में भी जा सकती है। कालदां का जंगल अभी टेरिटोरियल उपवन संरक्षक के अधीन है जो टाइगर रिजर्व का बफर जोन भी है तथा समृद्ध जैवविविधता वाला निर्जन वन क्षेत्र है। प्रारंभ के दो महीनों को छोड़कर बाघिन का व्यवहार एकदम शांत व जंगल के अनुकूल रहा है और लगातार मूवमेंट करती रहती है और आबादी क्षेत्र से दूर रहने लगी है।
गौरतलब है कि रणथंभौर की बाघिन एरोहेड के तीन युवा शावकों ने त्रिनेत्र गणेश मंदिर क्षेत्र व फोर्ट इलाके में अपना आशियाना बना रखा था। गत वर्ष हुई तीन घटनाओं में एक बच्चे सहित तीन लोगों को मौत के घाट उतारने की घटनाओं में भी इन्ही बाघ शावकों के शामिल होने की आशंका के चलते विभाग ने इन्हें रणथंभौर से अन्यत्र शिफ्ट करने का निर्णय किया था। इनमें से एक नर बाघ को धौलपुर करोली टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया तथा मादा बाघिन को आरबीटी 2508 को 13 माह पहले रामगढ़ में शिफ्ट किया गया था। इनकी एक बहिन कनकटी को मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया है।
