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शादी के समय पहना जाने वाला दुल्हें का सेहरा बना तलवास की पहचान

बून्दी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-हाडौती ही नहीं बल्कि राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों में भी हिन्दू समाज में विशेषकर ब्राह्मण समाज में शादी के समय सेहरा की आवश्यकता होती है। शादी के समय दूल्हा सेहरा लगाकर ही तोरण की रस्म अदा करता हैं। समाजों में इस सेहरे का बहुत महत्व है लेकिन समय के साथ साथ सभी मे बदलाव देखा जा रहा है। हाड़ौती में दूर दूर तक तलवास का सेहरा प्रसिद्ध है। शादी के सीजन में एडवांस में बुक करवानी होती है। पूर्व में बुक करवाने पर ही यह सेहरा समय पर तैयार हो पाता है। इस कार्य में दो व्यक्तियों को दो से तीन दिन लग जाते है। दुल्हा व दुल्हन के लिए अलग अलग सेहरा व मोरडी बनायी जाती है।
खजूर के कोपल वाले पत्तों से होता हैं तैयार
तलवास में बनाया जाने वाला ऐसा सेहरा हाड़ौती में कहीं भी नहीं बनाया जाता है। सेहरा बनाने वाले राधेश्याम सैनी ने बताया कि इसे खजूर के कोपल वाले पत्तों से तत्काल समय पर बनाया जाता है, जिसकी वजह से ताजा बना रहता है। तलवास मे खजूर के पेड़ पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है, तो इन पत्तों की उपलब्धता सहज हो जाती हैं।
आगामी वर्षो में देखने को न हीमिलेगा यह सेहरा
वर्तमान में यह सेहरा तलवास गांव के राधेश्याम सैनी के द्वारा बनाया जाता है। इससे पूर्व इनके पिता रामकल्याण माली बनाया करते थें। वर्तमान में राधेश्याम सैनी की पत्नी उसके निर्माण में सहयोग करती है। इनके पूर्व भी इनके परिवार वाले सेहरा का निर्माण किया करते थे लेकिन अब राधेश्याम सैनी के बाद परिवार में इस कला को कोई नही सीखना चाहता, जिसकी वजह से यह कला यही खत्म होने की कगार पर है। अन्य स्थानों पर भी सेहरा बनाया जाता है लेकिन ऐसी कला मे कही भी नहीं बनाया जाता है।
अपनी इस कला के भविष्य में जीवित रहने की बात पर चिंतित होते हुए राधेश्याम सैनी बताते हैं कि यह सेहरा आगामी वर्षो में देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि इस कार्य को आगे बढ़ाने वाले परिवार मे कोई रूचि शील नहीं है। यह कला इनके साथ ही चली जावेगी। इनके परिवार के अलावा अन्य कोई भी इसे सीखना नहीं चाहता।
सेहरा कला को सहेजने की जरूरत
तलवास ग्राम विकास समिति के मूल चन्द शर्मा ने कहा कि तलवास की शान की कला को सहेजने की जरूरत है। इस कला को अभी तक उच्च स्तर पर पहचान बनाए जाने की कोई पहल किसी भी स्तर पर नहीं हो पायी है। इस कला को संरक्षण देने की आवश्यकता हैं।