ढाक के तीन पात”…. कहावत को झुठलाता एक पत्ते वाला ढाक का दुर्लभ पेड़
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- ढाक के तीन पात की कहावत तो आपने सुनी ही होगी लेकिन राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक ऐसा ढाक का पेड़ सदियों से आस्था का केंद्र बना हुआ है जिसके डंठल पर एक ही पत्ता निकलता है। भीलवाड़ा जिले की कोटड़ी तहसील के नवगठित इटावा पंचायत के निकट यह पेड़ ढाक पर बनी इस कहावत को झुठला रहा है। इस पेड़ के उद्गम स्थल पर देवनारायण भगवान की मूर्ति व चबूतरा बना हुआ है और आसपास देववन (देवनारायण की बनी) विकसित किया गया है जिसमें से कोई भी पेड़ नहीं काटता। इस एक पत्ते के पलाश (जिसे राजस्थान के इस अंचल में छूँरा भी कहते हैं) के कारण इस देव स्थान को एकपन्या के देवनारायण कहते हैं। गौरतलब है कि इस देववन में पलाश के कई पेड़ है लेकिन इस एक को छोड़कर सभी तीन पत्तों वाले हैं। इस एक पत्ते वाले पेड़ के न तो फूल खिलते हैं और न हीं बीज बनते है जिससे यह एक ही है। बुजुर्गों के अनुसार इस स्थान पर इसी प्रजाति का ढाक का एक विशाल पेड़ था जो वृद्ध होकर सूख गया था। बाद में उसी सूखे पेड़ की जड़ों से यह नया पेड़ तैयार हो गया जो भी एक पत्ते वाला ही है। क्या आपके आसपास भी ढाक का इस तरह का कोई पेड़ है? कृपया जानकारी साझा करें।
