आकर्षक है बूंदी के भीमलत-अभयपुरा की खूबसूरत वादियां, वेटलेंड पर साल भर रहता है प्रवासी व अन्तःप्रवासी पक्षियों का जमावड़ा
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-राजस्थान जैसे विशाल प्रदेष का दक्षिणी-पूर्वी भूभाग प्रकृति की मनोहारी छटा प्रस्तुत करता है तथा इस मरू प्रदेश के एक अलग एवं रोमांचकारी स्वरूप से रूबरू कराता है। वर्ष भर कल-कल बहते दर्जनों नदी- नालों व हरियाली की चादर ओढे सेंकड़ों पहाड़ी दर्रों में स्वच्छंद विचरण करते वन्यजीवों व सदाबहार जलाशयों में दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों के कलरव वाला अभयपुरा बांध व भीमलत वैली इको टुरिज्म का अनुठा संगम है। टाइगर रिजर्व बनने के साथ ही इस क्षेत्र को पर्यटन जोन नंबर 3 के रूप में खोल दिया गया है जहां जल्दी ही पर्यटकों को एंट्री देने की तैयारी है। हरियाली वादियों के बीच खुले वाहनों पर सवार होकर इस जंगल की सैर पर्यटकों के लिए रोमांचकारी अनुभव सिद्ध होगा।
हाड़ौती व मेवाड़ की सीमा पर है भीमलत वैली
बूंदी-चित्तौड़ स्टेट हाइवे पर बूंदी से 26 व बिजौलियां से 24 किलोमीटर दूर स्थित भीमलत प्राकृतिक वैली वर्ष भर पानी की उपलब्धता व उपयुक्त नम भूमि के चलते प्रवासी, अन्तःप्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों से हमेशा आबाद रहती है। बाणगंगा नदी पर 1958 में भीमलत व 1965 में इसके सहायक बांध के रूप में अभयपुरा बांध को बनाया गया जिसका उद्देश्य नहरी तंत्र विकसित कर खेतों में सिंचाई व वन्यजीवों को पीने का पानी उपलब्ध कराना था। इसकी भराव क्षमता 26 फ़ीट है। यह बांध पहाड़ियों के बीच हाड़ौती व मेवाड़ की सीमा पर बना हुआ है।
