मित्रता में राजा और रंक सब बराबर : पं. गोबिंद भैय्या

आलमपुर.ShashiKanoyal/ @www.rubarunews.com>> श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिन सुदाम चरित्र की कथा का वर्णन किया गया। इसमें भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती ने दुनिया को यह संदेश दिया कि राजा हो या रंक दोस्त में सब बराबर होते हैं। कथा के अंतिम दिन श्रोताओं की भारी भीड़़ उमड़ी।

देभई के रामजानकी मंदिर पर चल रही श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन वृंदावन से पधारे कथव्यास पं. श्री आचार्य गोबिंदभैय्या महाराज ने कहा कि कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है। द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल के धाम, बतावत आपन नाम सुदामा सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने राजमहल के द्वार पर पहुंच गए। यह सब देख वहां लोग यह समझ ही नहीं पाए कि आखिर सुदामा में ऐसा क्या है जो भगवान दौड़े दौड़े चले आए। बचपन के मित्र को गले लगाकर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें राजमहल के अंदर ले गए और अपने सिंहासन पर बैठाकर स्वयं अपने हाथों से उनके पांव पखारे। कहा कि सुदामा से भगवान ने मित्रता का धर्म निभाया और दुनिया के सामने यह संदेश दिया कि जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। राजा हो या रंक मित्रता में सभी समान हैं और इसमें कोई भेदभाव नहीं होता। कथावाचक ने सुदामा चरित्र का भावपूर्ण सरल शब्दों में वर्णन किया कि उपस्थित लोग भाव विभोर हो गए। कथा के अंतिम दिन सेवढ़ा विधायक घनश्याम सिंह और पूर्व विधायक प्रदीप अग्रबाल ने पहुंचकर आशीर्वाद लिया। इस मौके पर पारीक्षत पं. रामसेवक पुजारी मंदिर महंत व राकेश नगरिया संयोजक केशव पुरोहित, रामशर्ण शर्मा, सोम चौहान, राहुल शर्मा समेत  समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे।