मन, वचन, काया की ईमानदारी से मन में उत्पन्न विचार व्यक्त करना और कार्य करना ही उत्तम आर्जव धर्म
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-श्री शांति सिंधु प्रभावना पावन वर्षायोग के तत्वावधान में मुनि सुप्रभ सागर महाराज व मुनि वैराग्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दशलक्षण महापर्व की आराधना देवपुरा में स्थित बघेरवाल छात्रावास के शांति सिंधु सभा मंडपम में शनिवार को प्रातः 5 बजे से प्रारम्भ हुई।
चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष पदम बरमुण्डा, संयोजक कमल कोटिया ने बताया कि दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन देते हुए मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा मन, वचन, काया की ईमानदारी, जो विचार मन में आएं, उन्हें ही दूसरों के सामने व्यक्त करना और वैसे ही कार्य करना उत्तम आर्जव धर्म है। मुनि वैराग्य सागर महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म का सार है सीधा बोलना, सीधा सोचना और सीधा कार्य करना।
चातुर्मास व्यवस्था समिति के उपाध्यक्ष गजेंद्र हरसोरा, मंत्री दिनेश बोरखंडिया,उप संयोजक सुरेश कोटिया, कोषाध्यक्ष जम्बू कुमार धानोत्या भानु खटोड, नवीन जेठानीवाल,चिराग जैन ने शिविर मे जिन शिविरार्थियों के तैला, पंचमेरु, दशलक्षण के उपवास चल रहे हैं उनकी सेवा सुश्रुषा की। विधान में सौधर्म इंद्र व इंद्राणी बनकर पूजन करने का सौभाग्य विमल कुमार-अनोख बाई बरमुण्डा को प्राप्त हुआ। इंद्र बनने का सौभाग्य नरेन्द्र -निर्मला कोटिया और हुकम चंद -ममता को प्राप्त हुआ, शांतिधारा धर्मचंद कोटिया परिवार ने की। दीप प्रज्वलन प्रांतीय अध्यक्ष बघेरवाल संघ महावीर धनोप्या ने किया। मिडिया प्रभारी नरोत्तम जैन,तरुण जैन ने बताया जबलपुर से आई संगीतकार प्राची जैन ने संगीतमय तरीके से पूजन संपन्न करवाई। सभी धार्मिक क्रियाएं बा.ब्र. मनीष भैया एवं देवेन्द्र कुमार जैन ने संपन्न करवाई।