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पर्युषण के चौथा दिन महावीर स्वामी के भावों की वांचना, कल्पसूत्र का हुआ वाचन

बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com>>जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में चल रहे पर्युषण पर्व के चौथे दिन शुक्रवार को धर्माराधना और तपस्या को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह रहा। आज निकला जाएगा पुस्तकजी का जुलूस
सुबह श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान की अंग पूजा, देव वंदन और आरती की। समाज के अनेक साधकों के 4 उपवास , एकासन सहित विभिन्न तप जारी हैं। शकुंतला भंडारी, उर्मिला भंडारी, गुलाब भंडारी, प्रमिला छाजेड, शकुंतला छाजेड ने पोषध किया जिस में साधु जीवन की भांति रहना होता है
जयपुर से आए स्वाध्याय विपिन छाजेड़ ने प्रवचन में भगवान महावीर स्वामी के 27 भवों की विस्तृत वांचना कराई। किस प्रकार हर भव में जो कर्म किए उन कर्मों को काट कर अंतिम भव में पहले देवा नंदा की कोख में आए किंतु राज कुल नहीं होने से हिरण गामीशी द्वारा देवता के आदेश पर माता त्रिशला के गर्भ में स्थापित कर दिया | माता त्रिशला को आए 14 स्वप्न इस प्रकार है – हाथी, वृषभ, सिंह, पुष्पों की माला, सूर्य, चंद्रमा, लक्ष्मी, शिर समुद्र, ध्वजा,स्वर्ण कलश, पदम सरोवर, दिव्यलोक, रतन की राशि, अग्नि शिखा है। सिद्धार्थ राजा द्वारा जब शास्त्रकारों से इन स्वप्नो के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया की आप के घर पुत्र का जन्म होगा जो तीर्थंकर बनेगे
कार्यक्रम में भगवान की अंगी-अतिका छाजेड़ एवं बहु मंडल के सहयोग से संपन्न की गई। समाज अध्यक्ष अशोक भंडारी एवं सकल जैन समाज सचिव आदित्य भंडारी ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान साय काल प्रतिक्रमण कर सभी जीव से क्षमा याचना की जाती है