पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन धर्माराधना एवं तपस्या में उमड़ा उत्साह
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com>>जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ द्वारा मनाए जा रहे पवित्र पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन भी सकल जैन समाज में धर्माराधना और तपस्या का उत्साह देखने को मिला। प्रातःकाल बड़ी संख्या में साधर्मिक श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान की अंग पूजा, देव वंदन, आरती सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। वहीं अनेक साधकों द्वारा उपवास, एकासन एवं अन्य तपस्याएं निरंतर की जा रही हैं।
पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन बाहर से पधारे स्वाध्याय विपिन छाजेड़ ने प्रवचन के माध्यम से साधर्मिक भक्ति एवं क्षमा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जैन धर्म में बताए गए 11 वार्षिक कर्तव्यों को विस्तार से समझाते हुए संघ पूजा, साधर्मिक भक्ति, यात्रा करना, स्नात्र महोत्सव, देवद्रव्य वृद्धि, महापूजा, रात्रि जागरण, ज्ञान पूजा, उद्यापन महोत्सव, तीर्थ प्रभावना एवं आलोचना आदि के धार्मिक महत्व को बताया। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि पर्यूषण पर्व आत्मशुद्धि, संयम, तप और क्षमा का पर्व है। इन दिनों की गई धर्माराधना व्यक्ति को आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है।
कार्यक्रम के दौरान भगवान की अंगी अतिका छाजेड़ एवं बहु मंडल के सहयोग से संपन्न की गई। साथ ही मति ज्ञान, अवधि ज्ञान, केवल ज्ञान, श्रुत ज्ञान एवं मनःपर्यव ज्ञान सहित जैन दर्शन में वर्णित ज्ञान के विभिन्न स्वरूपों पर भी जानकारी दी गई।
पर्यूषण पर्व के अंतर्गत कल्पसूत्र को विशेष धार्मिक विधि-विधान एवं जुलूस के साथ मंदिर में लाकर स्थापित किया गया। कल्पसूत्र के वाचन का शुभारंभ आगामी दिवस से किया जाएगा। कल्पसूत्र बौराने की बोली का लाभ उत्तमचंद छाजेड़ परिवार द्वारा लिया गया।
इस अवसर पर समाज अध्यक्ष अशोक भंडारी एवं सकल जैन समाज सचिव आदित्य भंडारी ने बताया कि पर्यूषण पर्व के दौरान समाज के श्रावक-श्राविकाएं उत्साहपूर्वक धर्माराधना, तपस्या एवं विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं। उन्होंने सभी समाजबंधुओं से अधिक से अधिक धर्माराधना कर पर्यूषण पर्व को सार्थक बनाने का आह्वान किया।
