🔴 RTI पर 50 वें स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय वेबीनार का हुआ आयोजन

निखिल डे शैलेश गांधी प्रवीण पटेल आत्मदीप अंजली भारद्वाज सौरव दास सहित कई महत्वपूर्ण वरिष्ठ एक्टिविस्टों और सूचना आयुक्तों ने कार्यक्रम में लिया हिस्सा

मप्र सूचना आयुक्त राहुल सिंह की अध्यक्षता में हुआ आयोजन

दतिया/ रीवा @rubarunews.com>>>>>>>>>>>> सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 को जन जन तक पहुंचाने के लिए एक अभियान प्रारंभ किया गया था। जब वर्ष 2019 में कोरोनावायरस का प्रकोप बढ़ा तब पूरा सिस्टम चरमरा सा गया। कोविड-19 न केवल देश बल्कि विदेशों में बुरी तरह अपना प्रभाव डाला। कार्यालय बंद हुए सूचनाएं बंद हो गयीं, कार्यालयों तक आना जाना बंद हो गया। आवेदक छोटी-छोटी जानकारी के लिए परेशान होने लगे। लोगों के पास तक आपस की पहुंच ही सीमित रह गई क्योंकि परिवहन बंद हुआ लेकिन एक बात जो नहीं बंद हुई वह था नेटवर्किंग।

इंटरनेट के माध्यम से कैसे देश के कोने कोने में बैठे आमजन तक अपनी बातें पहुंचाई जाए और कैसे लोगों को सूचना के अधिकार कानून की जानकारी दी जाए इसी विषय को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर वेबीनार का आयोजन प्रारंभ हुआ। इस प्रकार मई-जून 2020 में प्रारंभ हुआ यह कार्यक्रम आज अपने 50 वें पड़ाव पर पहुंचा। 06 जून 2021 दिन रविवार को 50 वें राष्ट्रीय मीटिंग वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें देश के जाने-माने सूचना के अधिकार आंदोलन से जुड़े हुए कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, सिविल राइट्स एक्टिविस्ट, पर्यावरण से संबंधित कार्यकर्ता, अधिवक्ता वर्तमान एवं पूर्व सूचना आयुक्त सहित लगभग एक सैकड़ा लोग जुड़े।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पहले की भांति वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के द्वारा किया गया जबकि कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वयन का कार्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, शिवेंद्र मिश्रा, पवन दुबे, अंबुज पांडे एवं छत्तीसगढ़ से आरटीआई कार्यकर्ता देवेंद्र अग्रवाल के द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप, मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक एवं वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता निखिल डे, कर्नाटका आरटीआई स्टडी सेंटर के ट्रस्टी वीरेश बेलूर, सतर्क नागरिक संगठन की प्रमुख एवं वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, फोरम फॉर फास्ट जस्टिस के होनरारी ट्रस्टी प्रवीण पटेल, माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु, माहिती अधिकार पहल गुजरात से वरिष्ठ कार्यकर्ता पंक्ति जोग सम्मिलित हुए।

वहीं पत्रकारिता के क्षेत्र से भी कई जाने-माने पत्रकार एवं एडिटर सम्मिलित हुए जिसमें सतना सागर पत्रिका समूह के वरिष्ठ संपादक राजेंद्र सिंह गहरवार, रीवा के वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार जयराम शुक्ला, न्यूज़ 24 से संदीप भमरकर, नई दुनिया के संपादक धनंजय प्रताप सिंह, इंडियन एक्सप्रेस के वरिष्ठ संपादक श्यामलाल यादव सहित कई अन्य लोग कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। आरटीआई कार्यकर्ता के तौर पर सुरेंद्र जैन, अंकुर मिश्रा, जेल रिफॉर्मर वनिता शेट्टी आदि लोग सम्मिलित हुए।

🔴 *सूचना, कोविड और तंत्र विषय पर आयोजित हुई परिचर्चा*

कार्यक्रम का प्रारंभ एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा कार्यक्रम में आमंत्रित किए गए प्रमुख वक्ताओं के इंट्रोडक्शन के साथ प्रारंभ हुआ। इसके उपरांत परिचर्चा में सम्मिलित वरिष्ठ आरटीआई एक्टिविस्टों ने अपनी अपनी बातें रखीं। निखिल डे ने बताया कि सभी को मिलकर काम करना पड़ेगा तभी सिस्टम में सुधार होगा। उन्होंने राजस्थान की भांति जन सूचना पोर्टल बनाए जाने एवं धारा 4 के प्रावधान लागू किये जाने पर जोर दिया।

वहीं अगले वक्ता के तौर पर अंजलि भारद्वाज ने कहा कि कोविड में चाहे वह पीएम केयर्स फंड हो अथवा आरोग्य सेतु से संबंधित जानकारी या फिर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन या फिर रेमडेसीवीर इंजेक्शन की उपलब्धता सभी में जानकारी छुपाने का प्रयास किया गया है। भारद्वाज ने कहा की जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित मामलों पर सूचना आयोग के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जो की चिंता का विषय है। सौरव दास ने कहा कि उन्होंने हाई कोर्ट मद्रास में सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन के विरुद्ध याचिका लगाई थी जिस पर अभी हाल ही में अंतरिम सुनवाई हुई है और कुछ रिलीफ प्राप्त हुई है जिस पर आयोग और सरकार को प्रतिदिन 3 से 4 घंटे तक लाइफ और लिबर्टी से जुड़े हुए मामलों पर सुनवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है।

सौरभ दास ने यह भी बताया कि उन्होंने ईमेल के माध्यम से लाइफ और लिबर्टी से जुड़े 48 घंटे वाले मामलों पर आरटीआई आवेदन दायर करने और जानकारी प्राप्त करने के प्रावधान के लिए भी मांग की है। दास ने कहा कि उन्होंने प्रथम अपील और द्वितीय अपील के लिए भी 48 घंटे जैसी व्यवस्था की मांग की है जिस पर अभी कोर्ट सुनवाई कर रही है। इन सब बातों में सूचना आयोग में होने वाले सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की क्राइटेरिया निर्धारित हो और सही व्यक्ति ही सूचना आयुक्त बने इस पर भी उन्होंने जोर दिया जाय। राजेंद्र सिंह गहरवार ने कहा की कोविड के दौरान सूचना तंत्र पूरी तरह से असफल रहा है और उन्हें और मीडिया वालों को कोई समुचित जानकारी प्राप्त नहीं हुई है जो कि काफी चिंता का विषय है।

 

उन्होंने न केवल हॉस्पिटल और मेडिकल संबंधी बल्कि सभी विभागों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़ा करते हुए बताया कि किस प्रकार पूरे देश की जनता परेशान हुई और कहीं न कोई सुविधा प्राप्त हुई न उससे संबंधित कोई जानकारी। आत्मदीप ने धारा 7(1) के प्रावधान लागू किए जाने और 48 घंटे के भीतर जानकारी उपलब्ध करवाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आरटीआई वेबीनार अपने 50 वें पड़ाव पर पहुंचा है जिसके हम सब साक्षी रहे हैं और यह हम सब के लिए बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा की सूचना आयुक्त चाहे वह रिटायर्ड हो अथवा वर्तमान सबका दायित्व है कि सूचना के अधिकार कानून को जन-जन तक पहुंचाएं और उसके लिए आरटीआई वेबीनार बहुत महत्वपूर्ण रोल अदा कर रहा है। बीच में अंजलि भारद्वाज ने जोड़ते हुए कहा कि आज सबसे बड़ी समस्या धारा 4 के तहत ज्यादा से ज्यादा जानकारी स्वतः ही उपलब्ध न करवाया जाना है। यदि जानकारी धारा 4 के तहत उपलब्ध होती है तो आवेदकों के लिए परेशान होना नहीं पड़ेगा। सरकारों द्वारा जारी की गई हेल्पलाइन पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी काम की नहीं होती हैं और ज्यादातर समय काम नहीं करती हैं।

वहीं प्रवीण पटेल ने कहा कि आज जो कोरोनावायरस और उसके बाद की स्थिति निर्मित हुई है उसके लिए हमारे देश प्रदेश की सरकारें जिम्मेदार है। हमने सही समय पर सही रणनीति नहीं बनाई जिसकी वजह से यह महामारी हमारे देश में फैली। कर्नाटक से आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेल्लूर ने कहा कि कर्नाटक में हाई कोर्ट के द्वारा स्वयं ही संज्ञान लेते हुए कोरोनावायरस के द्वारा मृत हुए लोगों के लिए सुनवाई की जा रही है जिसमें बढ़िया निर्णय आया है। उन्होंने बताया कि आयोग स्तर पर आरटीआई दायर करने के लिए वेब पोर्टल की व्यवस्था की गई है जो अच्छी बात है।

उन्होंने वहां की सरकार के द्वारा डिजास्टर से होने वाली मृत्यु पर 4 लाख रु मुआवजा देने संबंधी आदेश को भी उल्लेखित किया। वहीं मृत्यु के बाद लोगों को जलाने के लिए जगह नहीं मिल रही थी और काफी अफरातफरी थी इस विषय पर आईटी सेल के द्वारा गवर्नमेंट ने ऐप प्रारंभ करवाया है जहां क्रीमेशन के लिये ऑनलाइन स्लॉट उपलब्ध करवाए जाते हैं जो अच्छी व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। इस प्रकार उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा व्यवस्थाएं अब ऑनलाइन करने का प्रयास चल रहा है। यद्यपि कोविड दौर में कर्नाटक सूचना आयोग पूरी तरह से निष्क्रिय रहा जिस पर वीरेश बेलूर ने प्रश्न खड़ा किया है। कार्यक्रम में केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने धारा 4 और धारा 7(1) जीवन और स्वतंत्रता जिसमें 48 घंटे में जानकारी दिए जाने का प्रावधान होता है उस विषय पर कहा कि ऐसे समस्त बिंदुओं को एकत्रित किया जाना चाहिए और इसके लिए सबको मिलकर प्रयास करना चाहिए जिससे आयोग और सरकार पर दबाव बढ़े और आवश्यकता पड़ने पर कोर्ट जाकर इस पर जनहित याचिका भी दायर की जा सके। उन्होंने कहा कि भविष्य में हम सब इस विषय पर मिलकर कार्य करेंगे और पार्टिसिपेंट्स से ऐसे विषय पर जानकारी भेजने के लिए आग्रह किया।

कार्यक्रम में मिशन ग्राम सभा के संस्थापक पृथीपाल सिंह ढिल्लन भी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के अंत में प्रश्न उत्तर का सेशन रखा गया जिसमें आरटीआई वेबीनार में जुड़े हुए पार्टिसिपेंट्स ने अपने-अपने प्रश्न और डाउट पूंछे जिसका उपस्थित वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने जवाब दिए। उक्त जानकारी शिवानंद द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता जिला रीवा मध्य प्रदेश ने दी।