मां केवल व्हाट्सप्प फेसबुक स्टेटस तक ही सीमित, वृद्धाश्रम की माताओं का कोई महत्व नहीं – प्रणव शर्मा
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-मातृ दिवस के अवसर पर बूंदी से समाजसेवी प्रणव शर्मा ने वृद्ध आश्रम सुदामा आश्रम सेवा संस्थान में जाकर वृद्ध आश्रम में माता के साथ मातृ दिवस के संबंध में चर्चा कर एक अलग ही अनुभव सभी के साथ साझा किया! प्रणव शर्मा ने बताया कि जब सवेरे वह उठे तो उन्हें एकदम से वृद्ध आश्रम की मांताओ के बारे में विचार आया। उन्होंने सोचा कि जो माताएं घर पर अपने परिवार के साथ रह रहिए वह शब्द तो व्हाट्सएप स्टेटस फेसबुक डिजिटल के माध्यम से अपना मातृ दिवस मना रहे हैं लेकिन वृद्ध आश्रम में रह रही माताओं की भावों का क्या? घर मे बडे बुजुर्गो का सम्मान करना, उनकी जरूरतो का ध्यान रखना यह हमारी भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना है किन्तु आज फादर्स डे, मदर्स डे के दौर मे बडे बुजुर्गो का सम्मान एक दिवसीय हो कर रह गया है। माता-पिता परिवार मे घने वृक्ष की भूमिका निभाते है जिसकी छांव मे पंछी रूपी युवा अपना रेन बसेरा बनाते है किन्तु जब वही युवा बडे हो जाते है तो उस वृक्ष रूपी छांव छोड चले जाते है जिस तरह हाथ की पंाचो उंगलिया बराबर नही होती उसी तरह सारी युवा पीढियो पर यह बात पूरी सटीक नही बैठती लेकिन वो युवा जो भौतिकवादी युग मे अपने माता-पिता का महत्व शून्य सा मान लेते है उन्ही के आत्मसम्मान की रक्षार्थ व घर से बेघर हुये बुजुर्गो के सम्मान हेतु बून्दी जिले मे नैनवा रोड स्थित ‘‘आसरा’’ सुदामा सेवा संस्थान की नींव लगभग 2010 में रखी गई
सुदामा आसरा माताओं के लिए एक अनोखी मिसाल
संस्थान से जुड़े मनीष गौतम ने बताया कि यह संस्थान और वृद्ध आश्रम आसरा जिसके संरक्षक बूंदी विधायक हरि मोहन शर्मा एवं संरक्षण का श्रीमती राधा मोहन शर्मा है जिनको धन्यवाद कि इस समय में संतान को अपने एक माता-पिता का भी प्यार नसीब नहीं होता लेकिन यहां पर हमें एक नहीं दो नहीं अनेक माता का प्रेम और आशीर्वाद प्राप्त होता है। मैं उनके धर्मपुत्र के रूप में यहाँ रखकर उनकी सेवा करके एक अलग ही सुखद अनुभव पाता हूं। गौतम ने बताया कि संस्थान में लगभग 6 माता ऐसी है जिनको अपने अंतिम समय में भी अपने बेटे और बेटियां नहीं आई। संस्थान द्वारा सूचना देने पर भी वह इतने कठोर दिल के थे कि वह अपने माता का अंतिम दर्शन करने भी नहीं आए। लेकिन माता का धर्मपुत्र बनाकर उनका बिना संतान का अभाव महसूस नहीं करते हुए पूरे विधि विधान से उनका धर्मपुत्र के रूप में संस्थान द्वारा सब कुछ करवाया गया।
सुदामा एक परिवार है जिसका कोई नहीं उसका ही आसरा है संरक्षक विधायक शर्मा
मातृ दिवस के अवसर पर बूंदी विधायक एवं सुदामा सेवा संस्थान के संरक्षक शर्मा ने कहा कि यह सुदामा एक परिवार है यह संस्था एक ऐसा परिवार है जहां पर अनेक रिश्ते एक रिश्ते में बंधे हुए हैं। इस दुनिया में जिसका कोई सहारा नहीं है उसी के लिए आसरा बनाया गया है। मैं एक ऐसा शब्द है जिसकी कोई परिभाषा नहीं है जिसका कोई मूल्य नहीं है.!
मैं ईश्वर का बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं जिन्होंने आसरा सुदामा बरदाश्रम सुदामा सेवा संस्थान की यह संस्था जिसको हम नियमित रूप से सही ढंग से संचालित कर पा रहे हैं.! और आज करीबियां 18 माताएं हमारे पास निवास कर रही है.!
वही सुदामा सेवा संस्थान से जुडे छुटटन लाल शर्मा ने बताया माता के समान किसी और का पद नही, माता का दर्जा भगवान स्वरूप है। पुत्र भले कुपुत्र हो सकता है किन्तु माता कुमाता नही हो सकती। माता-पिता अपने पुत्र पुत्रियो के भविष्य निर्माण हेतु पूर्ण जीवन लगा देते है पुत्र पुत्रियो का भी दायित्व बनता है वह भी अपनी माता पिता को उचित सम्मान दे।
