डॉ. मीनू बिरला बनी कोटा कर्मचारी सहकारी समिति लि. सभा 108 की अध्यक्ष

कोटा.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-डॉक्टर मीनू बिरला को कोटा कर्मचारी सहकारी समिति लि. सभा 108 का नया अध्यक्ष चुना गया है। करीब 101 साल पुरानी संस्था में यह पहली बार है जब किसी महिला को कमान सौंपी गई है। कोटा में राजकीय कर्मचारियों की सबसे बड़ी सहकारी समिति कोटा कर्मचारी सहकारी समिति लि. सभा 108 का गठन वर्ष 1920 में किया गया था। वर्ष 1963 में श्रीकृष्ण बिरला पहली बार इस समिति के सचिव बने इसके बाद वे लगातार है कभी अध्यक्ष तो कभी सचिव का दायित्व निभा रहे थे। विगत 26 वर्षों से वे लगातार समिति के अध्यक्ष थे। इस दौरान संस्था ने बहुत तेजी से वृद्धि की और एक छोटे से पौधे के रूप में जन्मीं यह संस्था उनके कार्यकाल में वट वृक्ष बन गई।

 

समिति की शुक्रवार को निदेशक मंडल के सबसे वरिष्ठ सदस्य सूर्यकांत शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सचिव विमल जैन ने वरिष्ठ शिशु रोग चिकित्सक डॉ. मीनू बिरला को अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। सभी सदस्यों ने एक स्वर में डॉक्टर बिरला के नाम पर सहमति जताई जिसके बाद उन्हें अध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दिया गया। अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद राजेश बिरला चैयरमेन कोटा नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में कोटा जिला सहकारी होलसेल उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष हरिकृष्ण बिरला ने डॉ मीनू बिरला को शपथ दिलवाई।

 

पहली ही बैठक में 72 लाख के ऋण स्वीकृत
शपथ ग्रहण समारोह के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ मीनू बिरला की अध्यक्षता में सभा 108 की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति सदस्यों के लोन आवेदनों पर चर्चा करने के बाद 7 सदस्यों को 72 लाख रुपए के ऋण आवेदनों को स्वीकृति दी गई।

इस अवसर समिति सचिव विमल चंद जैन, वरिष्ठ सदस्य सूर्यकांत शर्मा, रासबिहारी पारीक, करण सिंह हाड़ा, गिरीश कुमार विजय, दिनेश पनवाड़ , ओम प्रकाश शर्मा, महिला सदस्य हंसा त्यागी, डॉ. विनोद पंकज, मुकुट बिहारी, कार्यपालक अधिकारी सीताराम शर्मा, निजी सहायक शिवकुमार शर्मा, शिवराज सिंह व अन्य कर्मचारी अधिकारी उपस्थित थे ।

सदस्यों के विश्वास पर खरा उतरना प्राथमिकता
नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. मीनू बिरला ने कहा कि श्रीकृष्ण बिरला जी ने ईमानदारी और समर्पण से इस समिति की नींव रखकर समिति सदस्यों की विश्वास रूपी पूंजी से इसे समृद्ध बनाया। मेरा प्रयास रहेगा कि वह कर्मचारियों की अपेक्षाओं व विश्वास पर खरा उतरते हुए समिति को उन्नति के पथ पर ले जाए।