मेल मिलाप की राह दिखा रहा अभियान

बून्दी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-  ’प्रशासन गांवों के संग अभियान’ के शिविरों में आपसी सहमति भूमि संबंधी मामलों का निस्तारण हो रहा है। ग्रामीणों के बरसों से चले आ रहे विवाद आपसी सहमति से निपट रहे हैं।
शिविरों में अब तक सौ से अधिक मामलों का निस्तारण हो चुका है और लगभग 250 लोग लाभान्वित हुए हैं। आपसी सहमति से विभिन्न प्रकार से 99 मामले सुलझे हैं। वहीं, पैतृक भूमि के 20 से अधिक लम्बित वाद निस्तारित हुए हैं। रास्ते के 19, गैर खातेदारी से खातेदारी के 10, सरकारी भूमि से अतिक्रमण के 8 प्रकरण निस्तारित हुए हैं। नामाातकरण के 1100 से अधिक तथा राजस्व अभिलेख अथवा खातों में शुद्धिकरण के 800 से अधिक प्रकरणों का निस्तारण कर ग्रामीणों को लाभान्वित किया गया है।
50 वर्ष पुराना विवाद सहमति से सुलझा
ग्राम पंचायत गोठडा में सोमवार को ’’प्रशासन गांवों के संग अभियान’’ में 50 वर्षो से लम्बित भूमि संबंधी प्रकरण का राजीनामें से निस्तारित हुआ।
शिविर प्रभारी मुकेश चौधरी ने बताया कि शिविर में राजस्व विभाग द्वारा ग्राम दुर्गापुरा के खाता संख्या 223 नया व 201 पुराना में दर्ज सहखातेदार रंगलाल मीणा निवासी दुर्गापुरा जमाबन्दी सम्वत् 2076-79 में खातेदार दर्ज रिकार्ड है, जो विगत 50 वर्षो से सहखातेदार के रूप में दर्ज थे। सोमवार को शिविर के अन्तर्गत धारा-53 राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के तहत सभी सहखातेदारों की आपसी सहमति से पृथक-पृथक खाते का विभाजन किया गया। सभी पृथक पृथक खातेदारों द्वारा खुश हाकर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रशासन गांव के संग अभियान की तारीफ की।
उन्होंने प्रसन्न होकर कहा कि हमारे पृथक-पृथक खाते होने से अब हमें सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाली योजना ऋण इत्यादि का लाभ प्राप्त हो सकेगा।
निराशा लेकर आई, मुस्कान लेकर लौटी रूक्मणी
तकरीबन 11 वर्षो से अपने पति से अलग रह रही रूक्मणी देवी अपनी पारिवारिक समस्या लेकर अपने बच्चों मीनाक्षी 14 वर्ष, अनमोल 11 वर्ष के साथ कैम्प स्थल पर पहुंची। तो उन्हें यकीन नहीं था कि यह शिविर इतना लाभदायक होगा। जब वह शिविर प्रभारी मुकेश चौधरी से मिली तो उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से बाबूलाल शर्मा को बुलाकर रूक्मणी देवी की हर तरह से सहायता करने का निर्देश दिया। त्वरित कार्यवाही करते हुए सर्वप्रथम परित्यक्ता प्रमाण पत्र बनवाया गया एवं पेंशन का आवेदन करवाकर पेंशन स्वीकृत करवाई गई। उसके बाद पालनहार योजना में आवेदन करवाकर हाथों-हाथ स्वीकृत भी करवाई गई। प्रार्थिया ने विभिन्न योजनाओं का एक साथ लाभ मिलने पर मुख्यमंत्री व प्रशासन को धन्यवाद दिया, वह बोली मेरा काम हुआ मैं बहुत खुश हूँ।
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