कालदां के जंगलों में चप्पे चप्पे पर लगेंगे कैमरे, तैयारियां पूरी वन विभाग ने वनकर्मियों को ट्रेनिंग देकर की टीमें गठित
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन को बाघों के अनुकूल बनाने की दिशा में वन विभाग ने वैज्ञानिक पद्धति से काम शुरू कर दिया है। बूंदी शहर से भीमलत महादेव तक के करीब 250 वर्ग किलोमीटर के जंगलों में शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए वन विभाग ने इस क्षेत्र में पहली बार ट्रेप कैमरे लगाने की शुरुआत कर दी है। जंगल की पगडंडियों पर हर एक किलोमीटर पर कैमरा लगाया जाएगा। इसके लिए गुरुवार को टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक (कोर) अरुण कुमार डी ने जैत सागर किनारे डिवीजन कार्यालय में वनकर्मियों को कैमरे लगाने व डाटा प्राप्त करने का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में टाइगर रिजर्व के फील्ड बायलॉजिस्ट नयन उपाध्याय ने कैमरों को लगाने की बारीकी से तकनीकी जानकारी दी। कालदां में कैमरे लगाने की मॉनिटरिंग कोर एवं टेरिटोरियल के दोनों उपवन संरक्षक कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान टेरिटोरियल डिवीजन के कालदां बफर जोन से जुड़े वनकर्मी भी शामिल हुए। इस क्षेत्र के सथूर गेट (बूंदी शहर), सथूर, डाटुन्दा, बसोली, खिण्या व गुढ़ानाथावतान वन नाका क्षेत्र के जंगलों को सर्वे के लिए शामिल किया गया है।
जनशून्य व उत्तम जैवविविधता वाले है कालदां के जंगल।
रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के टेरिटोरियल डीएफओ के अधीन आने वाले कालदां के जंगल बाघों के लिए बेहतरीन आश्रयस्थल है। बूंदी शहर से भीमलत महादेव तक के करीब 40 किलोमीटर लंबे व 6 किलोमीटर चौड़ाई में फैली सघन वनस्पति व पर्वतमालाओं वाले जंगल समृद्ध जैवविविधता वाले है। इस जंगल में बाघ-बघेरों के लिए प्राकृतिक गुफाएं व पेयजल स्रोत मौजूद हैं। इस इलाके में सदियों से बाघों की मौजूदगी रही है। टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र रामगढ़ सेंचुरी में बाघों के कुनबा बढ़ने पर बाघ इसी जंगल में अपना आशियाना बनाएंगे। इसकी शुरुआत युवा बाघिन आरवीटी 8 ने कर दी है जो चार महीने से इस जंगल में अपनी टेरेटरी बना चुकी है।
