खबरताजातरीनदतियामध्य प्रदेश

बाल विवाह में सहभागी बनने पर जुर्माना, जेल और पंजीकरण होगा रद्द- कलेक्टर वानखेड़े

कलेक्टर के नवाचार में बाल विवाह रोकने कड़ा आदेश:

बाल विवाह में शामिल टेंट, बैंड और पंडितों पर होगी FIR, लाइसेंस भी होंगे निरस्त

दतिया @Rubarunews.com>>>>>>>>>>>>>>>>>> बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में बाल विवाह की कुरीति को जड़ से खत्म करने के लिए कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने नवाचार करते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है।

जिला प्रशासन द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब विवाह से जुड़े सेवा प्रदाताओं को वर-वधू की आयु का सत्यापन करना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले व सहयोगी सभी सेवाप्रदाताओं पर न केवल भारी जुर्माना और जेल होगी, बल्कि संबंधित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस भी रद्द कर दिए जाएंगे।

कलेक्टर दतिया दुवारा एक अभिनव पहल करते हुए एक जिले के सभी वैवाहिक कार्यक्रम में सेवा देने वाले सेवाप्रदाताओं जैसे पंडित, हलवाई, टेंट, धर्मशाला, मैरिज हाल, बैंड, DJ, प्रिंटिंग प्रेस आदि सभी के लिए आदेश जारी कर निर्देश दिए है l आदेश का पालन करवाने के जिले SDM एवं थाना प्रभारियों कों निर्देशित किया है।​

सेवा प्रदाताओं के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश

कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश में पंडित, मौलवी, टेंट हाउस, कैटरिंग, बैंड-बाजा और मैरिज गार्डन संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:
​आयु का सत्यापन अनिवार्य: किसी भी बुकिंग से पहले वर (न्यूनतम 21 वर्ष) और वधू (न्यूनतम 18 वर्ष) के आयु प्रमाण-पत्र (मार्कशीट या जन्म प्रमाण-पत्र) की मूल प्रतियां देखनी होंगी।

आयु संबंधी कॉर्ड का संधारण:

सेवा प्रदाताओं को इन आयु प्रमाण-पत्रों की फोटोकॉपी अपने रिकॉर्ड में कम से कम 2 वर्ष तक सुरक्षित रखनी होगी। संदेह होने पर सूचना देना: यदि बाल विवाह की आशंका हो, तो तत्काल पुलिस, महिला बाल विकास विभाग या बाल कल्याण समिति को सूचित करना होगा। सूचना न देने पर सेवा प्रदाता को ‘सह-अपराधी’ माना जाएगा।

जागरूकता प्रदर्शन: मैरिज गार्डन और प्रतिष्ठानों में बाल विवाह निषेध अधिनियम से संबंधित पोस्टर और बैनर लगाना अनिवार्य है।

उल्लंघन करने पर कठोर दंड का प्रावधान

बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह को एक दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। आदेश के मुताबिक: दोषी पाए जाने पर 2 वर्ष का कठोर कारावास या एक लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। नियमों का पालन न करने वाले सेवा प्रदाताओं के लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी।

प्रशासनिक सख्ती
​इस आदेश की कॉपी पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ और सभी अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व) को भेज दी गई है।
​यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है और इसे किसी भी स्तर पर बढ़ावा देना कानूनन अपराध है।