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कॉलोनाईजिंग के लिए आवश्यक सभी अनुमतियां प्राप्त करें, प्रशासन की एडवाईजरी जारी

श्योपुर.Desk/ @www.rubarunews.com-कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट  अर्पित वर्मा द्वारा कॉलानाइजर्स के लिए एडवाईजरी जारी की गई है कि कॉलोनाईजिंग के लिए सभी प्रकार की आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर कॉलोनी विकसित करने का कार्य किया जायें, अन्यथा की स्थिति में कडी कार्यवाही की जायेगी।
प्रशासन की ओर से जारी एडवाईजरी में कहा गया है कि कॉलोनी विकसित करने से पूर्व कॉलोनाइजर को कलेक्टर कार्यालय से कॉलोनाईजिंग का लाइसेंस बनवाना होगा, अपंजीकृत कॉलोनाइजर द्वारा कॉलोनी काटी जाती है तो उसे अवैध माना जायेगा। इसके साथ ही कॉलोनाईजर्स को कॉलोनी विकसित करने से पूर्व भूमि का डायर्वसन कराना होगा और टाउन एंड कन्ट्री प्लान से अपु्रवल लेना होगा, इसके उपरांत कलेक्टर कार्यालय से कॉलोनी विकास अनुमति लेनी होगी। शहरी क्षेत्र में कॉलोनी होने की स्थिति में नगरीय निकाय में तथा ग्रामीण क्षेत्र में कॉलोनी होने की स्थिति में जनपद पंचायत में कॉलोनी विकास शुल्क जमा करना होगा। सभी प्रकार की औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद ही कॉलोनी विकास का कार्य किया जाये और इसके उपरांत ही कॉलोनी के भू-खण्ड विक्रय किये जाये, जिससे वैध कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों के सुगमता के साथ नामांतरण हो सके और उन्हें नागरिक सुविधाओं का लाभ मिल सके।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट  अर्पित वर्मा ने नागरिकों से भी अपील की है कि जिले में कही पर भी किसी भी कॉलोनी में प्लाट खरीदने से पहले उसकी वैधता के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। प्लाट खरीदने से पहले कॉलोनाईजर्स का लाइसेंस, भूमि का डायर्वसन और अनुमतियों की प्रति प्राप्त की जा सकती है, इसके अलावा वैध कॉलोनियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए कलेक्ट्रेट में स्थापित कॉलोनी सेल से परामर्श प्राप्त कर सकते है। नागरिकों की सुविधा के लिए यह सेल गठित की गई है और अधिकारियों द्वारा निशुल्क परामर्श प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई से भू-खण्ड खरीदने से पहले यह भलीभाति जान ले कि जिस कॉलोनी में वह भू-खण्ड खरीद रहा है, वह कॉलोनी वैध है या अवैध, कॉलोनाईजर द्वारा भूमि का डायर्वसन कराया गया है या नही, साथ ही टीएनसीपी से अप्रुवल है या नही तथा कॉलोनाइजर द्वारा विकास की अनुमति प्राप्त की गई है या नही। उन्होंने कहा कि सभी अनुमतियां प्राप्त कर एवं विकास शुल्क जमा कराकर नियमानुसार काटी जाने वाली कॉलोनियां वैध होती है तथा इन कॉलोनियों में नागरिक सुविधाएं विकसित की जाती है, अवैध कॉलोनियों में प्लाट खरीदने से लोगों को बिजली, पानी आदि की समस्या का सामना करना पडता है, नामांतरण भी नही हो पाता और मकान बनाने के लिए बैंक से आवास का ऋण भी नही मिलता है। इसलिए पूरी तरह से वैध कॉलोनियों में भी प्लाट खरीदे, जिससे बाद में होने वाली परेशानियों से बचा जा सकें।

Umesh Saxena

I am the chief editor of rubarunews.com