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16 वर्षीय बालिका ने 100 नंबर पर कॉल कर रुकवाया अपना बाल विवाह

बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-जिले के नमाना थाना क्षेत्र में एक सराहनीय एवं प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहां 11वीं कक्षा में अध्ययनरत 16 वर्षीय नाबालिग बालिका ने साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए अपने प्रस्तावित बाल विवाह को रुकवा दिया। बालिका ने 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस से सहायता मांगी और स्पष्ट रूप से बताया कि वह विवाह नहीं करना चाहती तथा आगे पढ़ाई जारी रखना चाहती है।
सूचना प्राप्त होते ही नमाना थानाधिकारी माया बैरवा ने तत्परता दिखाते हुए टीम के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। जांच में पाया गया कि बालिका का विवाह 19 अप्रैल 2026 को एक सम्मेलन में 27 वर्षीय युवक के साथ तय किया जाना था।
थानाधिकारी द्वारा बालिका की काउंसलिंग कर उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई। बालिका को सुरक्षा की दृष्टि से बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे सुरक्षित आश्रय गृह (शेल्टर होम) भेजा गया। साथ ही, नमाना थाना द्वारा संबंधित न्यायालय से बाल विवाह निषेध आदेश (निषेधाज्ञा) जारी करवाने की कार्रवाई भी की जा रही है।
बालिका की बहादुरी और जागरूकता ने न केवल उसके भविष्य को सुरक्षित किया, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश दिया कि शिक्षा और आत्मनिर्णय का अधिकार सर्वोपरि है। उसकी पहल से प्रशासन समय रहते सक्रिय हुआ और एक संभावित बाल विवाह को रोका जा सका।
उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में यह पांचवीं बालिका है, जिसने स्वयं आगे बढ़कर साहस का परिचय देते हुए अपना बाल विवाह रुकवाया है, जो समाज में बढ़ती जागरूकता और सशक्तिकरण का सकारात्मक संकेत है।
विधिवत निषेधाज्ञा की जारी
 इसके अतिरिक्त, श्री हरि भजन मीणा, नायब तहसीलदार नैनवा द्वारा भी एक अन्य प्रकरण में 15 वर्षीय नाबालिग बालिका के प्रस्तावित बाल विवाह पर त्वरित संज्ञान लेते हुए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। इस प्रकरण में संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट से विधिवत निषेधाज्ञा जारी करवाई गई, जिससे एक और बाल विवाह को समय रहते रोका जा सका। वहीं दूसरी और चाइल्डलाइन काउंसलर मनजीत कौर के प्रार्थना पत्र पर हिंडोली क्षेत्र में एक अन्य मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दो नाबालिग बालिकाओं के प्रस्तावित बाल विवाह पर निषेधाज्ञा जारी की गई है। साथ ही, मजिस्ट्रेट द्वारा बालिकाओं के माता-पिता को समझाइश दी गई कि यदि वे बाल विवाह करते हैं, तो वे विधिक रूप से उत्तरदायी होंगे एवं न्यायिक प्रक्रिया के भागीदार बनेंगे।