जीवन से उत्तम विचारों को स्थान देने से व्यक्ति बनता है चरित्रवान – ब्रह्माकुमारी सुषमा दीदी

बून्दी.KrishnaKantRathore/@www.rubarunews.com>> – जिला कारागृह स्थित तालाब गॉव में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के तत्वावधान मेंं बंसत पंचमी के उपलक्ष्य पर जेल में बंद कैदी भाईयों के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस अवसर पर जिला कारागृह कार्यवाहक उप अधीक्षक लोको उज्जवल सिहं , ब्रह्माकुमारी सुषमा दीदी, ब्रह्माकुमार खुषराज भाई उपस्थित थे।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी सुषमा दीदी ने बताया कि सर्दी के बाद आने वाली वंसत ऋतु का हमारे देष में बहुत महत्व है। बसंत माना ‘सब दुःखों ,परेषानियों का बस अंत ,सदाबहार मौसम ,पेडों पर नई कोपलों का फूटना ,आमों पर बौर का छा जाना ,प्रकृति में नई बहार का आना ,खेतों में पीली सरसों का लहलहाना ,सभी का खुष रहना आदि । इस दिन को सरस्वती दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है। सरस्वती दैवी को ज्ञान ,विवके ,सौम्य ,षांतिमयी प्रतिमूर्ति के रूप में देखा जाता है। मंदिरों आदि में अनेक धार्मिक कार्यों का आयोजन होता है। परमम्परा अनुसार बच्चे आज के दिन अपनी किताबें ,कॉपी ,पेन,पेंसिल आदि मॉ सरस्वती के चरणांं में रख देते है और किसी को भी उन्हें छूने की इजाजत नहीं होती है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि सरस्वती देवी इस दिन किताबों को वरदानों से भरपूर करती है।
उन्होंने बसंत पंचमी का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा यह पर्व अज्ञान अधंकार से निकल उमंग -उत्साह ,आनंद एवं ज्ञान रूपी प्रकाष की ओर अग्रसर होने का संदेष देता है। बसंत पंचमी के दिन से ही होलिका की आकृति का लकडी का गठ्ठर इकठ्ठा कर दिया जाता है जिसमें हर दिन और लकडियॉ लगाते है जों 40 दिन बाद होली वाले दिन जलातें हैं । जो विकारों रूपी बुराइयों ,दुर्गुणां के भस्म होने का द्योतक है।
ब्रह्माकुमारी सुषमा दीदी ने बताया कि मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने तथा जीवन से उत्तम विचारों को स्थान देने के लिए आध्यात्मिकता को अपना कर आध्यात्मिक ज्ञान एवं राजयोग के अभ्यास से हमारा जीवन चरित्रवान बन जाता है। राजयोग के अभ्यास से सहनषीलता ,नम्रता ,एकग्रता ,षांति और धैर्यता के माध्यम से सद्गुणो का विकास होकर आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा जीवन की समस्याओं का समाधान मार्ग प्रदर्षित होता एवं सदा के लिए नषे से मुक्ति मिल जाती है।
ब्रह्माकुमार खुषराज भाई ने बताया जीवन के बारे में अनेक विचारकों ने अपने विचारों में कहा जीवन हार जीत का एक खेल है। तो किसी ने कहा जीवन एक नाटक है ,किसी ने कहा जीवन एक या़त्रा है। जीवन अर्थात अंतर्मन का अवलोकन कर बाहर कदम उठाना हैं। जीनव के दो पहलु है – आंतरिक और बाह्य । जीवन के चार पहलु है शारीरिक ,सामाजिक ,मानसिक ,और आध्यात्मिक । आज हर व्यक्ति अपने जीवन में सुख और शांति चाहता है। आज के मनुष्यों दुःखों का कारण विषय विकारों है। बुराईयों के वषीभुत होकर वह जीवन में बुरे गलत कर्म करने लगता है। जिससे उसके जीवन में तनाव ,दुःख अषांति पेदा होंती है। मन में उत्पन्न नकारात्मक विचारांं के कारण मन अषांत एवं मनोबल में गिरावट आती है। जिस व्यक्ति का मन अषांत तनाव वा कमजोर मनोबल वाला होता है। उस व्यक्ति के जीनव में सकट एवं सघर्ष होता है। राजयोग मेडिटेषन से मन को शांत सकारात्मक बनाया जा सकता है।
कार्यवाहक उप अधीक्षक लोको उज्जवल सिहं ने कहा अच्छे विचारों से ही जीवन अच्छा बनता है। जों भी आपको ज्ञान की बाते बताई जाती उन्हे दिल से महसुस करके आत्म सात करेगें तो आपको जीवन जीने का आनंद आने लगेगा ।

Umesh Saxena

I am the chief editor of rubarunews.com