कविता संवेदनात्मक ह्रदय की गहन अनुभूति है -कांति शुक्ला

भोपाल.Desk/ www.rubarunews.com- कविता संवेदनात्मक ह्रदय की गहन अनुभूति है,समाज में कविता के उपादेयता सदैव रही है और आगे भी रहेगी | यह उदगार हैं वरिष्ठ साहित्यकार कांति शुक्ला ‘उर्मि’ के जो लघुकथा शोध केंद्र भोपाल एवम अपना प्रकाशन द्वारा आयोजित पुस्तक पखवाड़े के अंतर्गत श्रीमती अनीता मिश्रा ‘सिद्धि’ (पटना )के सद्य प्रकाशित कविता सँग्रह ‘ भावों का संगम ‘ के लोकार्पण एवम विमर्श अवसर पर अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रकट कर रही थीं | साथ ही इस अवसर पर उन्होंने का की ज़िंदगी की टूटन छंद के बंध को स्वीकार नहीं करती प्रस्तुत सँग्रह की रचनाओं में भावों का उन्मेष है ,इन विविध वर्णी कविताओं का स्वागत किया जाना चाहिए |कार्यक्रम के प्रारम्भ में लघुकथा शोध केंद्र की निदेशक कांता राय ने स्वागत वक्तव्य देते हुए इस कृति की रचनाकार को बधाई दी | इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ साहित्यकार श्री अशोक धमेनिया ने कहा कि -‘ मन में उठे विचारों के भावों की अनुभूति की अभिव्यक्ति से काव्य का सृजन होता है ,प्रस्तुत कविता संग्रह की कविताएं शिल्प नहीं भावना प्रधान कविताएं हैं ,सँग्रह में नारी पीड़ा की प्रधानता मुख्य तत्व है कविताओं में रुदन अमंगल का प्रतीक है ,जो कविता में अभिव्यक्त किया जाएगा वह फलित और घटित भी होगा अतः हमें विपरीत और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सकारात्मक का भाव लिए सृजन करना चाहिए | ‘ इस आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ राजलक्ष्मी शिवहरे ने इन कविताओं को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया | उन्होंने नारी मन की सशक्त अभिव्यक्ति की इन कविताओं को ह्रदय और मर्म स्पर्शी सृजन की संज्ञा दी | आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में कांता राय ने कहा कि यह कविताएं अपने परिवेश प्रकृति और सँस्कृति से जुड़ी कविताएं हैं कवियत्री की कविताएं पाठक को अपनी सी लगती हैं यह कविताएं आत्मा का सौंदर्य बोध करवाती हैं ,नारी वेदना के मूल स्वर वाली यह कविताएं समाज में दिखावे के लिए नहीं यथार्थ में नारी को उसका सम्मान जनक स्थान दिलवाने की जद्दोजहद से उपजी कविताएं है | कार्यक्रम के अंत में श्रीमती अनिता मिश्रा “सिद्धि” ने सभी उपस्थित जनों का आभार प्रकट करते हुए कुछ रचनाओं का वाचन किया |आयोजन का सफल संचालन डॉ रंजना शर्मा ने किया | कार्यक्रम में अंजू खरबंदा ,अरुण अर्णव खरे, बिजेंद्र जैमिनी , कुसुम सिंह कल्याणी , आचार्य विजय गुंजन , महेश राजा , डॉ ऋचा यादव ,मधुरेश नारायण , भूपेंद्र ,दिव्या , अन्नपूर्णा शर्मा , राजन तेज़ी ,भारती पराशर , पवन जैन , शेख शहज़ाद उस्मानी , डॉ कुमकुम गुप्ता ,मेघा मैथिल ,मृदुल त्यागी , मुज़फ्फर इकबाल सिद्दीकी ,जया आर्य , डॉ गिरजेश सक्सेना सहित नगर देश प्रदेश के अनेक काव्य प्रेमी रसिक उपस्थित थे |