यूजीसी काले कानून के विरोध में सवर्ण समाज ने निकाली आक्रोश रैली
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-यूजीसी काले कानून के विरोध में सवर्ण समाज के लोगों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। सवर्ण समाज ने आज शहर में यूजीसी के विरोध में आक्रोश रैली निकाल जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। रैली आजाद पार्क से शुरू हुई जो शहर के मुख्य बाजारों से होते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंची, जिला कलेक्ट्री के अंदर जब लोगों को प्रवेश नही दिया गया तो रैली में मौजूद लोगों ने रास्ता जाम करते हुए अपना विरोध जताया। एक प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा।ज्ञापन में लिखा है कि यूजीसी द्वारा हाल ही में इक्विटी एक्ट 2026 रेगुलेशन लागू किया है जो 2012 के पुराने रेगुलेशनस की जगह लेता है। इस रेगुलेशन में दावा किया जा रहा है कि यह जब शिक्षा में समानता लाएगा और धर्म, जाति, लिंग जन्म स्थान, दिव्यागता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकेगा। हर संस्थान में एक इक्यात औषध्येनिटी सेंटर बनाया जाएगा जो भेदभाव की शिकायतों को संभालेगा और कमजोर वर्ग का सपोर्ट करेगा।
इसके विपरीत यूजीसी के नियम निर्माताओं और सरकार द्वारा एक क्षण भी नहीं साधा गया कि क्या इस नियम का दुरूपयोग नहीं किया जा सकता। इस पर यदि तनिक भी विचार किया होता तो केवल एक वर्ग विशेष को यह नियम समर्पित भेदभावपूर्ण एवं राहत देने वाला नहीं होता।
हमारे देश का छात्र वर्ग जो कि सुनहरे भारत का स्वर्णकार है देश के लिए समर्पित है जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आपस में सभी जाति वर्ग से मित्रता रखता है। उन पर यदि इन नियमों को थोपा जाएगा तो आपस में द्वेष की भावनाए जागृत होगी। भारत के स्वर्ण समाज जो कि जाति पाती को मुलकर समाज में एकजुट रहते है हिन्दु एकता की मिसाल बने हुए हैं उन्हें नियमों के बंधन में यदि बांधा जाएगा तो भारतीय संविधान की प्रस्तावना का जो संदेश है जहां हम भारत को संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य है उसके मायने ही नहीं रहेंगे।
ज्ञापन देने वालों का कहना है कि यूजीसी के काले कानून को वापस लिया जाए इसका हम सब घोर विरोध करते हैं। भारत देश को जाति पाती में बांटा जाए। इस दौरान मिथिलेश दाधीच, विश्वनाथ माहेश्वरी, बुंदेल सिंह राठौर, हर्षवर्धन भटनागर, योगेंद्र जैन, संतोष पाटनी, संजय जैन, हिम्मतसिंह गौड़, सुनील हाडौती, महेश जिंदल, निरंजन जिंदल, मनीष गौतम, विशाल क्रांतिकारी, पीयूष शर्मा, विकास सनाढ्य, नंदसिंह, ए. पंकज दाधीच, ओमप्रकाश जैन, सुखविन्द्र सिंह, पप्पिंद्र सिंह, आशु तोतला, पवन अग्रवाल, राजीव लोचन गौतम, नागेश्वर तिवारी, संजय शर्मा, धन्नजय शर्मा, बंटी गौतम, घनश्याम दूबे, शिवांशू शर्मा, मनोज जैन, कृष्णमुरारी चर्तुवेदी, पियूष शर्मा, चंद्रशेखर शर्मा, रविन्द्र काला, द्वारका मंत्री, किरण शर्मा, कुसुम शर्मा, कीर्ति सुखवाल, मंगूमल टेकवानी, मुकेश माधवनी, महेश चांदवानी, राजकुमार बूलचंदानी, जीतू राजानी, कोमल, गायत्री, हर्षिता आदि मौजूद रहे।
