गौड़ राजाओं के आगमन व उनके सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान पर होगा शोध- उपाध्याय

श्योपुर.Desk/ @www.rubarunews.com>>श्योपुर के इतिहास में गौड़ देश बंगाल से अजमेर व बाद में श्योपुर आये गौड़ राजाओं का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है परन्तु अभी तक इनके श्योपुर आगमन‌ के समय तथा श्योपुर में उनके सामाजिक, सांस्कृतिक धार्मिक व कला के क्षैत्र में योगदान पर शोध कार्य नहीं हुआ है




श्योपुर में स्थित किले, गढ़ियों(Citadel), मंदिरों(Temples), छतरियों (Chhatris) उनमें बनी चित्र कला(Picture art),बाबडियां कुंड(Babdiyan Kund), प्राचीन मठ(ancient monastery) उनकी स्मृति को अक्षुण्ण बनाए हुए हैं पर आवश्यकता इनकी जानकारियों को लोगों तक पहुंचाने की है ताकि हम उन पर गर्व कर सकें

उक्त उद्गार अपर कलेक्टर श्योपुर एवं जिला पुरातत्व एवं पर्यटन परिषद के नोडल अधिकारी रूपेश उपाध्याय(Rupesh Upadhyay) ने किला स्थित मुक्तिबोध कला वीथिका में गौड़ राजाओं के ऐतिहासिक(Historical), सामाजिक व सांस्कृतिक(social and cultural) योगदान विषय पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए




उपस्थित विद्वतजनों का मानना था कि इस विषय पर अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है जिसके लिए शोध किए जाने की आवश्यकता है इस कार्य हेतु इतिहास परिषद का गठन किया गया जिसके संरक्षक  रूपेश उपाध्याय रहेंगे जबकि  संयोजक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राध्यापक श्रीमति ज्योति शुक्ला(Mrs. Jyoti Shukla) को बनाया गया परिषद के सदस्य शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राध्यापक खेमराज आर्य(Khemraj Arya) , अनिल तोमर(Anil Tomar), सहरिया संग्रहालय के केयरटेकर आदित्य चौहान(Aditya Chauhan) व पुरातत्त्वविद कैलाश पाराशर(Kailash Parashar) रहेंगे जो गौड़ राजपूतों से जुड़े स्थानो वह उनके विषय में जानकारी रखने वाले विद्वानों से संपर्क स्थापित कर इसका डोक्यूमेंटेशन करेंगे यह जिम्मेदारी प्रो अनिल तोमर(Prof. Anil Tomar) को सौंपी गई