सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से तंबाकू उद्योग ने स्वयं का प्रचार किया- शोध

दतिया @rubarunews.com>>>>>>>>>>>>>> शोध पत्र में बताया की कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) (सामाजिक रूप से जिम्मेदारप) गतिविधियों के माध्यम से तंबाकू उद्योग ने स्वयं का प्रचार किया।

 

फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबेको कंट्रोल की धारा 13 और भारतीय सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (COTPA) का उल्लंघन हो रहा है

अंतराष्ट्रीय जर्नल, टोबेको कंट्रोल में प्रकाशित शोध पत्र में यह बताया गया है कि कोविड १९ के पाँच महीने की अवधि में भारतीय तंबाकू उद्योग ने कोविड-19 राहत प्रयास के रूप में विभिन्न सरकारी फंड में नकद और वस्तु के रूप में लगभग यूएस $37 मिलियन दान दिये। शोधकर्ताओं के अनुसार इस प्रकार की कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी से विश्व स्वास्थ्य संगठन के फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबेको कंट्रोल की धारा 13 और भारतीय सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (COTPA) का उल्लंघन हो रहा है। इस शोध पत्र के लेखक अमित यादव, प्रनय लाल, रेनू शर्मा, आशीष पांडेय, और राना जगदीप सिंह हैं।

भारत में केरल में 30 जनवरी, 2020 को कोविड-19 का पहला केस रिपोर्ट हुआ था। दो महीने बाद, भारत ने पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया, और इस दौरान भारतीय तंबाकू कंपनियों ने कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के रूप में महत्वपूर्ण राहत प्रयास प्रदान करने शुरू कर दिये।

 

शोध पत्र के अनुसार:

• भारतीय तंबाकू उद्योग ने सीएसआर गतिविधियाँ आयोजित करके कोविड-19 वैश्विक महामारी का लाभ उठाया, जो की वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबेको कंट्रोल (FCTC)की धारा 5.3 और 13 का उल्लंघन है।
• CSR गतिविधियों को भारतीय सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA)के अंतर्गत प्रतिबंधित किया गया है, इस कानून के अंतर्गत तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन को पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

• तंबाकू कंपनियाँ, कंपनी अधिनियम 2013 में मौजूद एक कमी के माध्यम से CSR गतिविधियाँ आयोजित करने में सक्षम हो गईं, जिसमें बड़े कारपोरेट को CSR गतिविधियों के लिए अपना 2% वार्षिक लाभ खर्च करने का प्रावधान है जिसे कोटपा प्रतिबंधों के अधीन किया जाना है।

• CSR गतिविधियों से तंबाकू उद्योग को रोकने के लिए, कंपनी अधिनियम में तंबाकू कंपनियों को इससे बाहर रखने के लिए संशोधन करना चाहिए।

अग्रणी शोधकर्ता डॉ. अमित यादव ने कहा की “तंबाकू कंपनी की कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी न तो नई है न ही वैध है,” और इसे सभी रूपों में सख्ती से प्रतिबंधित करना चाहिए। ऐसी कोई भी परिस्थिति नहीं है जिसके अंतर्गत यह उपयुक्त है।

तंबाकू के सेवन से हर साल 13.5 लाख से अधिक भारतीयों की मृत्यु होती है, और लगभग 27 करोड़ भारतीय तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन करते हैं। प्रत्येक तीन तंबाकू सेवन करने वाले व्यक्तियों में से एक व्यक्ति की समय से पहले मृत्यु हो जाती है, अत: तंबाकू उद्योग को अपना लाभ बरकरार रखने के लिए नए उपयोगकर्ताओं की आवश्यकता होती है।
मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसेशन के कार्यकारी निदेशक मुकेश कुमार सिन्हा का कहना है की कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के माध्यम से तम्बाकू कंपनिया समाज में अपनी अच्छी छवि बनाने का प्रयास करती है और दूसरी और लाखों लोगो की मृत्युं तम्बाकू सेवन से होने वाली बिमारियों से हो जाती है जो की एक बहुत बड़ा विरोधाभास है, तम्बाकू कंपनियों के २ प्रतिशत कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फण्ड को सरकार को लेकर उसे तम्बाकू नियंत्रण के लिए खर्च करना चाहिए ताकि इस मद की राशि का तम्बाकू कंपनिया अपनी छवि चमकाने के लिए न कर पाए।

इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ, बैगलुरू के निदेशक डॉ. उपेंद्र भोजानी ने कहा की , “यह देखते हुए यह अध्ययन बहुत ही सामयिक और प्रासंगिक है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने हाल ही में कोटपा में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस शोध पत्र के सुझाव को देखते हुए, कोटपा में प्रस्तावित संशोधन करते हुए भारत में तंबाकू कंपनियों द्वारा किसी भी सीएसआर और कारपोरेट प्रोत्साहन को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए इससे भारतीय तंबाकू नियंत्रण कानून विश्व स्वस्थ्य संगठन के फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबेको कंट्रोल (FCTC)की धारा 13 के सम्मत हो जायेगा।

हीलिस सेखसरियाइंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ, नवी मुंबई के निदेशक डॉ. प्रकाश गुप्ता ने इस शोध पत्र की उपयोगिता बताई और कहा की , “इस शोध पत्र पेपर के निष्कर्षों में वैश्विक महामारी के दौरान तंबाकू उद्योग की यह युक्ति दर्शाई गई है जिसमें नीति निर्माताओं और विधान मंडल तक पहुँचने के लिए कारपोरेट और ब्रांड छवि में सुधार करने का प्रयास किया गया है।”

 

द यूनियन के डिप्टी रीजनल डायरेक्टर डॉ. राना जे सिंह के अनुसार

द इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्युबरकुलोसिस एंड लंग डिजीज (द यूनियन) साउथ ईस्ट एशिया ऑफिस, नई दिल्ली के डिप्टी रिजनल डायरेक्टर और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक डॉ. राना जे सिंह ने कहा, “हमारे शोध पत्र में तंबाकू उद्योग द्वारा वैश्विक महामारी का लाभ उठाने का प्रयास करने का उल्लेख किया गया है तथा सरकारों से तंबाकू कंपनियों द्वारा सभी सीएसआर गतिविधियों के आयोजन को प्रतिबंधित करने की तत्काल अपील की गई है।”

मुकेश कुमार सिन्हा
कार्यकारी निदेशक
मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसेशन  Mob: 9752022520

 

पेपर का पूर्ण उद्धरण: Yadav A, Lal P, Sharma R, et al. Tob Control. Epub ahead of print: [15April 2021] doi:10.1136/tobaccocontrol-2020-056419

इस अध्ययन का पूर्ण विवरण प्राप्त करने या मीडिया पूछताछ के लिए कृपया संपर्क करें:
• मेगनक्विटकिन, डिप्टी डायरेक्टर, पॉलिसी, [email protected], +1 646 221 9524

• डॉ. अमित यादव,सीनियर टेक्नीकल एडवाइजर – तम्बाकू नियंत्रण, द यूनियन साउथ ईस्ट एशिया ऑफिस, नई दिल्ली, [email protected],+91 999 934 3502

 

साभार – रामजी शरण राय सदस्य गवरनिंग बोर्ड व वकुल शर्मा कार्यक्रम समन्वयक, मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसेशन (MPVHA)