समृद्ध है बूंदी जिले की आबोहवा जिसमें है राजस्थान के तीन टाइगर रिजर्व
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में स्थित रणथंभौर (आरटीआर), रामगढ़-विषधारी (आरवीटीआर) और मुकुंदरा हिल्स (एमएचटीआर) बाघ अभयारण्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और तीनों बाघ संरक्षण क्षेत्र राजस्थान के एक छोटे लेकिन जैवविविधता में समृद्ध बून्दी जिले का भाग है। जिले के मध्य में स्थित रामगढ़ विषधारी बाघ अभयारण्य एक महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे के रूप में कार्य करता है, जिसे सही तरीके से बाघों के अनुकूल बनाया जाए तो उत्तरपूर्व में आरटीआर और दक्षिण में एमएचटीआर के बीच समृद्ध बाघ आश्रयस्थल सिद्ध होगा। भौगोलिक रूप से भी तीनो टाइगर रिजर्व एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, जिसमें रामगढ़-विषधारी (1501 वर्ग किलोमीटर) एक बड़े व समृद्ध वन क्षेत्र वाला है।
बूंदी के 242 वर्ग किलोमीटर जंगल घोषित है रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बफर जोन
आरटीआर से लगते इंदरगढ़ रेंज में कुँवालजी से जैतपुर तक 242 वर्ग किलोमीटर इलाका रणथंभौर टाइगर रिजर्व में आता है जो उसका बफर जोन है। इसमें जिले के इंद्रगढ़, लाखेरी, गेण्डोली, बलवन, कोटड़ी, बाबई व तलवास क्षेत्र के जंगल शामिल हैं। हालांकि इसका प्रशासनिक नियंत्रण जून 2022 से उपवन संरक्षक RVTR के अधीन है लेकिन अभी तक यह RTR का भाग है।
बूंदी के 77 वर्ग किलोमीटर जंगल है मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बफर जोन का भाग
कोटा के पास स्थित और बूंदी, कोटा, झालावाड़ और चित्तौड़गढ़ जिलों में फैला हुआ, MHTR, RVTR के दक्षिण में स्थित है। इसमें बून्दी जिले के डाबी क्षेत्र के गुढ़ा-राजपुरा व अम्बा रानी वन खण्ड का 77.59 वर्ग किलोमीटर जंगल के साथ धनेश्वर पंचायत का रोजा का तालाब व जवाहर सागर पंचायत मुख्यालय गांव को शामिल किया है।
रामगढ़ को मिले गति ताकि रणथंभौर व मुकुन्दरा भी आपस में जुड़ें
राजस्थान के अकेले रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व को बाघों के अनुकूल बनाया जाने से धौलपुर से मेवाड़ व मध्यप्रदेश तक के बाघों के लिए गलियारा बनकर उभरेगा। रामगढ़ विषधारी का विकास और विस्तार एक व्यापक संरक्षण रणनीति का हिस्सा है जिसकी सही क्रियान्विति से ही बाघों की बढ़ती आबादी को नए इलाके मिलेंगे। हम सब का उद्देश्य विशेष रूप से रणथंभौर से आने वाले बाघों के लिए अधिक रहने योग्य स्थान प्रदान करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।
