नर्स व डॉक्टरों का व्यवहार मरीजों से संतोष जनक नहीं

भिण्ड.ShashikantGoyal/ @www.rubarunews.com>> जिला अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे मरीज व प्रसूताओं का ईलाज करने की बजाये उल्टा खिजलाना शुुरु कर देते हैं सबसे बड़ी बात यह है कि डॉक्टर से लेकन नर्स व वार्डवॉय तक बीमार मरीजों के अटेडऱों से बात करना तक उचित नहीं समझते इस तरह चिल्लाते हैं कि उनके सामने कोई मुजरिम खड़ा हो। अस्पताल को चमकाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर दिये ताकि बाहर से देखने में बहुत सुन्दर व आकर्षक लगे और ग्रामीण क्षेत्र से जो मरीज यहां उपचार कराने के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें भी ऐसा लगता है कि यहां पहले से ज्यादा व्यवस्थाएं ठीक हो गई हैं जगह-जगह काउन्टर, ट्रामा सेन्टर, इमरजेंसी सुविधा, मुफ्त दवाएं देने के वायदे किए जा रहे हैं लेकिन इनका लाभ यहां का स्टाफ मरीजों को उठाने नहीं देता है और अपने चहतों को लाभ पहुंचाने में लगे हुए हैं। अगर पदस्र्थ नर्स व डॉक्टरों का सगा संबंधी यहां ईलाज कराने के लिए आ जाये तो उसे वह सारी सुविधा मुहैया करायी जाती हैं जो प्रायवेट में नर्सिंग में होती है लेकिन आमजन के साथ यहां इस तरह का व्यवहार क्यों किया जाता है, इसी तरह यहां की नर्स व डॉक्टरों की दबंगई हावी रहेंगी।

जांचों में उलझकर रह जाते मरीज

शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों से उपचार कराने के लिए जब मरीज यहां पहुंचते है तो उन्हें किसी तरह की जानकारी नहीं होती है ईलाज संबंधित किसी डॉक्टर व नर्स से बातचीत करने की कोशिश करती हैं उससे पहले ही यहां का स्टाफ धमकाना शुरु कर देता है। कई तरह की जांचो में उलझा देता है जिसकी सही तरह से इन मरीजों को जानकारी तक नहीं दी जाती है कि कौन से कॉउन्टर पर कहां पर है और कौन सी जांच कहां होगी, जब तक मरीजों को सही जानकारी नहीं मिलेगी तब तक वह सही जांच कराने में असमर्थ रहेगे।

प्रायवेट में उपचार कराने को मजबूर

कुछ प्रसूताओं को कहना है कि जिला अस्पताल में पदस्थ लेडिज़ डॉक्टर व नर्स सही से बातचीत नहीं करती और न ही जानकारी उपलब्ध कराती हैं, इस बजह से प्रायवेट नर्सिंग होम में पहुंचकर उपचार कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिला अस्पताल में पदस्थ नर्स व लेडिज डॉक्टरों से जब उनकी निजी पे्रक्टिस के दौरान उपचार कराने के लिए पहुंचते हैं तो सारी जानकारी आसानी से मिल जाती है और रास्ता भी सही दिखया जाता है।