बीज उत्पादन कृषि विकास की रीढ़- डॉ. एम.सी. जैन
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के निदेशक अनुसंधान, डॉ. एम.सी. जैन द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, बूंदी की विभिन्न इकाइयों का निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने केंद्र में संचालित समस्त शैक्षणिक, अनुसंधान एवं उत्पादन गतिविधियों का अवलोकन किया। विशेष रूप से उन्होंने बीज उत्पादन इकाइयों की कार्यप्रणाली, गुणवत्ता मानकों, वैज्ञानिक प्रबंधन प्रणाली, उत्पादन संरचना तथा उत्पादन क्षमता की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।निरीक्षण के दौरान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. महेश चौधरी ने केंद्र द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने केंद्र द्वारा संचालित बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत गेहूं, चना, मसूर, सरसों, धनिया आदि फसलों के प्रमाणित एवं गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन की प्रक्रिया, वैज्ञानिक तकनीकों तथा क्षेत्रीय किसानों तक इनके वितरण की व्यवस्था के बारे में विस्तार से अवगत कराया।
इस अवसर पर विषय वस्तु विशेषज्ञ (मृदा विज्ञान) डॉ. सेवा राम रुण्डला ने केंद्र पर स्थापित विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों, प्रयोगात्मक संरचनाओं एवं तकनीकी इकाइयों की जानकारी देते हुए उनके उद्देश्य, उपयोगिता एवं कृषक हित में उनकी भूमिका को स्पष्ट किया। वहीं फार्म मैनेजर महेन्द्र चौधरी द्वारा दलहनी बीज विधायन केंद्र के अंतर्गत संचालित बीज उत्पादन कार्यक्रमों, उत्पादन प्रक्रिया, भंडारण व्यवस्था एवं वितरण प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
निरीक्षण के दौरान केंद्र के लौकेश प्रजापत एवं रामप्रसाद भी उपस्थित रहे। केंद्र की टीम द्वारा निदेशक अनुसंधान को बीज उत्पादन की वर्तमान स्थिति, उत्पादन तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली, प्रमाणन प्रक्रिया तथा किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की कार्ययोजना की समग्र जानकारी दी गई।
डॉ. एम.सी. जैन ने कृषि विज्ञान केंद्र, बूंदी द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बीज उत्पादन कृषि विकास की रीढ़ है। यदि बीज गुणवत्तापूर्ण होगा, तो उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय स्वतः ही बढ़ेगी। इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र, बूंदी द्वारा किया जा रहा कार्य क्षेत्रीय किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी एवं प्रेरणास्पद है। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से सब्जी बीज उत्पादन को कार्यक्रम में सम्मिलित करने, फार्म की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधार, संरक्षित खेती, तथा तकनीकी नवाचारों को अपनाने पर विशेष बल दिया, जिससे केंद्र को आत्मनिर्भर, मॉडल एवं राजकीय स्तर पर अनुकरणीय इकाई के रूप में विकसित किया जा सके। निरीक्षण कार्यक्रम के अंत में भविष्य की कार्ययोजना, अनुसंधान विस्तार समन्वय, तकनीक अंतरण, तथा किसानों के हित में नवाचार आधारित गतिविधियों को और अधिक सुदृढ करने हेतु जोर देने पर बल दिया।
