राजस्थान

संतमति को धारण करने के लिए ब्रह्मज्ञानी संतों का संग आवश्यक – सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

  बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-‘ब्रह्मज्ञानी संत महात्माओं के संग द्वारा संतमति को धारण कर, जीवन को सरल एंव सहज बनाया जा सकता है। मानवीय गुणों को अपनाकर अपनी गलतियों में सुधार करे और छल कपट वाला जीवन नहीं अपितु एक दूसरे के लिए समर्पित भाव वाला जीवन जीने का संदेश आज बूंदी में आयोजित संत समागम में निरंकारी सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने दिया। सभी श्रद्धालु भक्तों, नगवासियों एंव मानवता को संदेश देते हुए सतगुरु ने फरमाया कि जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सत्गुरु माता जी ने समझाया कि केवल मनुष्य जन्म लेना, दैनिक कार्य करना तथा पारिवारिक दायित्वों को निभाना ही जीवन नहीं अपितु वास्तविक जीवन तो वह है जिसमें इस परमपिता परमात्मा की पहचान कर, उससे इकमिक हुआ जाये। ईश्वर ने हमें जो यह अमोलक जन्म दिया है उसका सदुपयोग करते हुए फरिश्ते जैसा जीवन जीये और अपने कर्म, आचरण, व्यवहार से सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने। स्वयं को सदैव अच्छाईयों की ओर ही केन्द्रित करे तभी मानव जीवन सार्थक बन सकता है।

विशाल जनसमूह बना मर्यादा और संयम का पर्याय

बूंदी शहर में लंका गेट स्थित पुरानी धान मण्डी में आयोजित विशाल निरंकारी संत समागम सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित हुआ। आयोजन को लेकर बूंदी सहित हाड़ौती भर के निरंकारी भक्तों सहित सभी समाजों के लोगों में उत्सुकता देखी गई। जो आज सुबह से ही सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के दर्शनों को आतुर नजर आएं। महेश चांदवानी ने बताया इस विशाल निरंकारी संत समागम में बूंदी एंव आसपास के नगरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में उपस्थित हुए। श्रद्धालुओं ने सतगुरु के साकार दर्शन और पावन प्रवचनों का श्रवण करने की संतुष्टि और अलौकिक दिव्यता उन सभी के मुखों पर झलक रही थी। विशाल समागम में आए श्रद्धालुओं सहित आमजन का विशाल जन समूह मर्यादा और संयम का पर्याय बना। विशाल जनसमूह होने के बावजूद किसी प्रकार की अव्यवस्था देखने को नहीं मिली। कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले शहर के प्रमुख चौराहों और रास्तों, निर्धारित पार्किंग स्थल पर निरंकारी कमांडो मुस्तैद रहे। वहीं विशाल जनसमुदाय के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग सुविधा, लंगर, प्रसादी वितरण और जलपान सहित अन्य व्यवस्थाओ में निरंकारी स्वयंसेवकों का अनुशासन काबिलेतारिफ रहा। सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का संत समागम कल बुधवार को टोंक जिले में आयोजित होगा। जोनल इंचार्ज ब्रजराज सिंह और संयोजक गुरमुखदास चांदवानी ने सत्गुरु माता जी के बूंदी शहर में दिव्य दर्शनों के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया और साथ ही प्रशासन एवं स्थानीय सज्जनों के सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया।

सत्गुरु माता जी ने भक्ति की चार अवस्थाऐं

संत समागम में श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए सत्गुरु माता जी ने भक्ति की चार अवस्थाओं का जिक्र करते हुए समझाया कि पहली अवस्था वाला भक्त हर दुख सन्ताप से डरता है। वह केवल भय के कारण ही भक्ति करता है। दूसरा भक्त अर्थाथी है जो केवल धन वैभव की मांग करते हुए किसी खास इच्छा की पूर्ति हेतु भक्ति करता है। तीसरा भक्त जिज्ञासु प्रवृति वाला है जो ईश्वर से अन्जान है और उसकी जानकारी प्राप्त करने हेतु सदैव तत्पर रहता है। सबसे उत्तम श्रेणी वाली अवस्था चैथे भक्त की होती है जो ब्रह्मज्ञान द्वारा हरि को जानकर भक्ति करता है। यही अवस्था संतों, महात्माओं द्वारा युगों युगों से बताई जा रही है कि जिस प्रेमाभक्ति से सराबोर होकर मीराबाई ने प्रभु के प्रति नृत्य, गायन से अपने प्रेम को दर्शाया, संत कबीर ने भी अपने दोहो के माध्यम से यही समझाने का प्रयत्न किया कि परमात्मा की पहचान करके जीवन को सफल बनाया जा सकता है।