दो वर्ष तक कृषि कानूनों को स्थगित रखना भारतीय संविधान का उल्लंघन

भिण्ड.ShashikantGoyal/ @www.rubarunews.com>> भारतीय संविधान कानूनों को बनाए रखने या हटाने की व्यवस्था देता है न कि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को 2 साल 6 महीने 1 महीने को स्थगित करने की व्यवस्था भारतीय संविधान के अंदर नहीं है यह संवैधानिक संकट भविष्य में खड़ा करने की सरकार की योजना को  किसान संगठनों ने विफल कर दिया  किसान संगठनों ने सरकार का दो साल कानूनो को लंबित रखने का प्रस्ताव संवैधानिक संकट को देखते हुए वापस कर दिया किसानों और सरकार की 11 दौर की वार्ता में भारत सरकार के मंत्रियों द्वारा कृषि कानूनों को लेकर किसानों को जो प्रस्ताव दिया गया कि 2 साल तक हम कानूनों को स्थगित कर  एक कमेटी बनयेगे लेकिन किसान नेताओं ने इस पर गंभीरता से विचार करते हुए पाया कि भारतीय संविधान कभी भी किसी कानून को स्थगित करने की इजाजत नहीं देता अगर किसान नेता यह बात मान लेते और आंदोलन समाप्त कर देते तो भारतीय संविधान की मूल भावना ही मर जाती है। 26 जनवरी को 72 वां गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय संविधान की आत्मा को तोडऩा अनुचित है क्योंकि किसानों की शिक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेहतर है  उक्त बात 16 दिन से गोल मार्केट पर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने को संबोधित करते हुए भारत की जनवादी नौजवान सभा के केंद्रीय कमेटी के सदस्य अनिल दौनेरिया ने व्यक्त किए किसान संयुक्त मोर्चे के नेताओं ने दिल्ली हरियाणा उत्तर प्रदेश की पुलिस द्वारा किसानों को 26 जनवरी के दिन ट्रैक्टर परेड में सहयोग करने की उन्हें बधाई दी आज 16वें दिन के धरने की अध्यक्षता अवधेश सिंह भदोरिया ने की धरने पर मुख्य रूप से प्रयाग नारायण कटारे ग्राम साकरी बच्ची लाल हरसाना अवधेश भदोरिया महेश चंद जैन मुन्नालाल बाथम सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।