ओह । एक बड़ा सितारा टूटा

 

कोई सागर दिल को बहलाता नही ,
बेखुदी में भी करार आता नहीं ।

भोपाल शैलेन्द्र शैली/ @www.rubarunews.com- हिन्दी सिनेमा की ऐतिहासिक त्रई के गौरवशाली युग का पूर्णतः अवसान हो गया ।पहले राजकपूर नहीं रहे ,फिर देवानंद , और अब दिलीप कुमार जी भी नहीं रहे । एक बड़ा सितारा टूट गया ।
दिलीप कुमार जी का अभिनय एक पाठशाला है ।जीवन के विभिन्न रंगों की तीव्रतम और मार्मिक अभिव्यक्ति वे जिस सहजता से करते थे ,वह बेमिसाल है ।उनकी तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती ।वे जिस शिखर पर थे ,वहां वे अकेले थे ।
दिलीप कुमार जी ने अभिनय की गरिमा को स्थापित किया ।वे निर्भीक , जुझारू , कर्मठ अभिनेता थे ।सही बात को निर्भीकता से कहने में कभी भी संकोच नहीं किया ।

दिलीप कुमार बनने की सुदीर्घ यात्रा में वे अपना मूल नाम यूसुफ खान काफी पीछे छोड़ आए थे ।फिर उस नाम की तरह कभी देखा भी नहीं ।

वे मानवता ,सदभाव , सहिष्णुता और धर्म निरपेक्ष मूल्यों के पक्षधर रहे ।साम्प्रदायिक दंगों ,तनाव और उन्माद के दौरान दिलीप कुमार जी का प्रतिरोध इतिहास के पन्नों में दर्ज है ।
दिलीप कुमार एक ऐसा नाम है , जिसको लेकर भारतीय उप महाद्वीप की जनता एकता और सदभाव के सूत्र में बंध कर रह सकती है । हमेशा याद रहेंगे दिलीप कुमार साहब ।बेहद सम्मान और शिद्दत के साथ श्रद्धांजलि अर्पित है ।