बूंदी की दोहिती व कोटा की बेटी जिज्ञासा शर्मा बनी RAS..

बून्दी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com– हाल ही में जारी आरएएस-2018 के परिणाम में डाक्टर जिज्ञासा शर्मा ने एचआई कैटेगरी में तीसरी रैंक के साथ सफलता प्राप्त की है। पांच साल की उम्र में श्रवण क्षमता में 80 प्रतिशत कमी आ जाने के बावजूद बचपन से ही मेधावी रही जिज्ञासा ने दादाजी दुर्गा प्रसाद शर्मा संस्कृत के व्याख्याता से सेवानिवृत्त व गायत्री परिवार शांतिकुंज से जुड़े होने से घर में शिक्षा के संस्कारों के कारण फिजियोथेरेपी में डॉक्टर की शिक्षा (डिग्री) प्राप्त करके इसमें अच्छी महारत हासिल की और चांदनी अस्पताल व डॉ. अखिल जोशी डायबिटिक सेंटर कोटा में नौकरी की।

लेकिन मन में आरएएस बनने की उत्कंठा हुई तो आईएएस मणिराम शर्मा व आईएएस इरा सिंघल से प्रेरणा लेकर 2016 से आरएएस की तैयारी में जुट गई। इस दौरान उन्हें गुरू सीपी जांदू का पूरा मार्गदर्शन और सहयोग मिला और अपने पिता सेवानिवृत्त लेखाकार कर्मचारी नेता सूर्यकांत शर्मा, माता अनुपमा शर्मा व भाई डॉ. गौरव शर्मा के सहयोग से जिज्ञासा ने आरएएस की मैन परीक्षा तक का सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।

उसके बाद वह इंटरव्यू की तैयारी में जुट गई और इस दौरान उन्हें फैसले करने के रिकार्ड धारी आरएएस पंकज ओझा का नियमित मार्गदर्शन और इंटरव्यू में सफलता के टिप्स मिलते रहे और अंततः डॉ जिज्ञासा शर्मा ने डाक्टर से प्रशासनिक अधिकारी का सफर पूरा कर लिया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यह जिज्ञासा शर्मा का प्रथम प्रयास था और उन्होंने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ स्टडी से यह सफलता प्राप्त की।

 

जिज्ञासा शर्मा का बूंदी वैद्यनाथ पाड़ा लंका गेट में ननिहाल है, उसके नाना गोपाललाल शर्मा सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर हैं और फूफाजी स्वतंत्र पत्रकार व एडवोकेट अनुराग शर्मा हैं। जिज्ञासा शर्मा ने इस सफलता का श्रेय अपने सभी गुरूजनों, मार्गदर्शन करने वालों व पूरे परिवार को दिया है और जो भी प्रशासनिक दायित्व मिलता है उसे कर्तव्य निष्ठा व समाज में न्याय के साथ पूरा करने का प्रयास करने का संकल्प लिया है।

 

बधाईयां देने का तांता लगा....
सर्वब्राह्मण समाज कोटा के पदाधिकारियों ने जिज्ञासा शर्मा के निवास आरकेपुरम पहुंचकर जिज्ञासा के दादाजी दुर्गा प्रसाद शर्मा, ताऊजी ओमप्रकाश शर्मा, पिता सूर्यकांत शर्मा, माता अनुपमा शर्मा, भाभी शिखा शर्मा का माल्यार्पण कर दुपट्टा धारण करवाकर स्वागत किया और जिज्ञासा को स्मृति चिन्ह प्रदान कर शुभकामनाएं दी। इसके अलावा पारिवारिक मित्रों रिश्तेदारों का सोशल मीडिया पर व घर आकर बधाईयां देने का तांता लगा हुआ है।