रामगढ़-विषधारी की जीवन रेखा है मेज नदी
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के मध्य भाग में बहने वाली सदानीरा मेज नदी इस टाइगर रिजर्व की जीवन रेखा कही जा सकती है। इस नदी किनारे बना महल बूंदी के दरबार राम सिंह जी के कार्यकाल में बना जो रामगढ़ महल के रूप में जाना जाता है। महल से पश्चिम दिशा में 13 किलोमीटर दूरी पर एक प्राकृतिक नाले में हाड़ा राजपूतों का प्राचीन ठिकाना विषधारी बसा हुआ था जो अब उजड़ चुका है जहां अभी मिट्टी से बने हुए महल व प्राचीन बावड़ियां है। इस जंगल में स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ महल व प्राचीन विषधारी गांव के आधार पर ही इस सेंचुरी का नामकरण रामगढ़-विषधारी हुआ जो देश का 52 वां टाइगर रिजर्व बना। वर्तमान विषधारी गांव प्राचीन आबादी से एक किलोमीटर दूर नया बसा है जहां हाड़ा राजपूतों की कुलदेवी आशापुरा माताजी का मंदिर है। इस नदी किनारे पूर्व में खटकड़ कस्बा है। इस नदी में बड़े-बड़े दह (पानी के भंडार) है जो भीषण गर्मी में भी वन्यजीवों की प्यास बुझाने में काम आते हैं। इनमें भेरू जी का दह, कोहनी दह तथा समेला दह प्रमुख है। समेला दह स्थान पर माछ्ली नदी मेज नदी में मिलती है।
