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दुर्लभ हुए कैथा के पेड़ कहीं लुप्त न हो जाए यह औषधीय पादप

बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- केंत, कैथा या Wood Apple (Limonia acidissima) एक अत्यंत गुणकारी औषधीय पेड़ है जिसकी संख्या राजस्थान में गिनती की रह गई है। कुछ वर्षों पहले तक यह पेड़ हर गांव-ढाणी, खेत-खलिहान व जंगलों में आसानी से दिख जाते थे लेकिन देखते ही देखते इनकी संख्या कम हो गई। आफरी जोधपुर के वैज्ञानिक इस पेड़ की वस्तुस्थिति का राज्य के सभी जिलों में सर्वे कर रहे है तथा इसके पेड़ों पर नंबर भी डाल रहे हैं। इससे राज्य में इन पेड़ों की संख्या का अनुमान लगाया जा सकेगा तथा संरक्षण की योजना बनेगी। इस पेड़ के फलों, पत्तियों, छाल, जड़ और गोंद का उपयोग हजारों वर्षों से आयुर्वेद में पाचन विकार, दस्त, मधुमेह, लिवर और किडनी संबंधी बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है।

कोटा की कचोरी में कथौड़ी का कमाल

कोटा की कचोरी के प्रसिद्ध होने में इसकी खट्टी चटनी का ही कमाल है। बच्चे इसको पकने पर पत्थर से तोड़कर चाव से खाते हैं और शरबत आदि भी बना सकते हैं। इसका सूखा पाउडर कथौड़ी के रूप में विभिन्न सब्जियों व पकवानों में काम आता है।

बूंदी में मिले एक दर्जन पेड़

शुष्क वन अनुसंधान केंद्र (आफरी) जोधपुर की टीम के द्वारा इस सप्ताह बूंदी जिले में इसकी वस्तुस्थिति का सर्वे किया गया जिसमें करीब एक दर्जन पेड़ दर्ज किए जा सके। इस पेड़ की तरह परम्परागत इमली के पेड़ भी कम दिखने लगे हैं। इन जैसे दुर्लभ औषधीय गुणों वाले पेड़ पौधों का संरक्षण किया जाना हम सभी का सामुहिक दायित्व बनता है।