किसानों ने जलाईं कृषि कानूनों की प्रतियाँ

भिण्ड.ShashiKantGoyal/ @www.rubarunews.com>> किसानों का धरना पांचवें दिन भी जारी रहा परेड चौराहे पर शाम 4:00 बजे किसानों ने कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं। भाजपा मोदी सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि कानूनों में दो कानून खेती के संबंध में हैं तीसरा कानून जनता की रोटी से सम्बन्धित है,  वस्तु अधिनियम कानून 2020 में सरकार ने जनता के जीवन जीने के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थ गेहूं दाल चावल तिलहन को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर कर दिया है इसका परिणाम अडानी अंबानी जैसे व्यापारी अधिक मात्रा में खाद्य पदार्थों का भंडारण कर बाजार में कृतम अनाज संकट पैदा करेंगे बाजार में खाद्य पदार्थों की कमी होगी उनकी कीमत आसमान छूने लगेंगी जो आम जनता के लिए खरीदना मुश्किल होगा जनता में भुखमरी फेलेगी अभी तक भारत सरकार 23 फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी करती है उनमें ज्यादातर खादय फसलें हैं इसका अर्थ न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक कीमत पर व्यापारी यदि किसानों की फसल फसल खरीदता है तो किसान अपनी उपज व्यापारी को बेचेगा इससे सरकार के गोदाम खाली हो जाएंगे सरकार को यह अपने अनाज के गोदाम भरना है तो उसे या तो देश के व्यापारी से ऊंची कीमत पर खाद्यान्न खरीदना पड़ेगा या फिर जनता को सस्ती दर पर अनाज देने की योजनाएं बंद करनी पड़ेगी जिससे जनता की पहुंच से खाद्यान्न दूर होंगे जनता खाद्यान्न के लिए व्यापारियों की कृपा पर आश्रित रहेगी सरकार  जनता को भूखा मरता देखती रहेगी यदि उस व्यापारी को विदेशों में अधिक मुनाफा मिलेगा तो वह वहां बेचेगा और देश में खाद्यान्न का कृत्रिम संकट पैदा होगा  मोदी सरकार ने व्यापारी को विदेश में अनाज पहुंचाने के लिए पूरी व्यवस्था कर दी है  देश में अनाज का परिवहन करने के लिए रेलगाडिय़ां एव विदेशों में अनाज पहुंचाने के लिए बंदरगाह एवं पानी के जहाज दे दिए हैं इसलिए किसान जो लड़ाई आज लड़ रहा है वह किसान से अधिक देश की जनता को भविष्य में भूख से बचाने के लिए यह आंदोलन किसानों और जनता का आंदोलन है अखिल भारतीय संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय आह्वान पर पूरे देश में आज किसान एवं आम जनता विरोधी काले कानूनों की प्रतियां जलाई गई उसी के तहत भिंड शहर में भी  शाम 4:00 बजे परेड चौराहे पर कृषि कानून की प्रतियां जलाई गई कार्यक्रम में मुख्य रूप से देवेंद्र सिंह चौहान , अनिल दौनेरिया, डॉ. नदीम खान, सूरजरेखा त्रिपाठी, रामलखन डंडोतिया, जुगलकिशोर बाथम, श्रीकृष्ण वाल्मीकि, अवधेश भदोरिया, नाथूसिंह बघेल, जगदीश यादव, विक्रांत दीक्षित, जनार्दन रेड्डी, किशोरीलाल शाक्य, दिव्या चौहान, रमाशंकर, गोरीशंकर नरवरिया, नेकराम सांकरी, अरूण यादव, संजय पुरोहित, संदीप कुशवाह आदि लोग शामिल थे।