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जिला अस्पताल में ऑपरेशन से डिलीवरी के बाद तीन प्रसुताओं को किया कोटा रैफर दो प्रसूताओं की मौत, एक की हालत गंभीर

बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-पिछले दिनों कोटा सहित राज्य के अन्य अस्पतालों में ऑपरेशन बाद प्रसूताओं की मौत के बाद भी चिकित्सा प्रशासन सबक नहीं ले रहा हैं। बूंदी जिला अस्पताल के जनाना विंग में लगातार लापरवाही की घटनाए सामने आ रही है। बुधवार को जनाना अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में तीन प्रसुताओं का ऑपरेशन द्वारा प्रसव करवाया गया। ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं की तबीयत खराब होने पर तीनों को आनन फानन में कोटा रैफर कर दिए जाने की बात सामने आई है। जिसमें से प्रसूता वर्षा सेन और 25 वर्षीय कविता कुमावत की इलाज के दौरान मौत हो गई, वहीं एक प्रसूता जीनत का कोटा में उपचार चल रहा है।

ब्लडिंग होने पर किया रेफर
मृतक प्रसूता कविता कुमावत के पति भागचंद कुमावत ने बताया कि बड़ा नया गांव कुमावतो की झोपड़ियां निवासी 25 वर्षीय कविता कुमावत की शादी उसके साथ हुई थी प्रथम डिलेवरी 3 साल पहले ऑपरेशन से हुई। दूसरी डिलेवरी के लिए बुधवार को जिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती करवाया था, जहाँ चिकित्सको ने ऑपरेशन से डिलेवरी किए जाने की बात कही। जिस पर 12 बजे कविता को ओ.टी में लिया गया और ऑपरेशन के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट किया । इन्होंने बताया कि वार्ड में शिफ्ट करने के कुछ समय बाद वहां मौजूद चिकित्सक और कर्मचारियों को पता लगा कि कविता के ब्लडिंग अधिक हो रही है, तो उन्होंने तुरंत कविता को कोटा रैफर कर दिया। रेफर करने के बाद परिजन 4 बजे बाद कविता को कोटा लेकर गए, जहां शाम 6 बजे निजी चिकित्सालय में कविता की मृत्यु हो गई। मामले में चिकित्सको का कहना था की ब्लड अत्यधिक बह जाने के कारण पल्स डाउन और बीपी कम हो गया था।

मृतका वर्षा के पति ने लगाए ये आरोप
इसी प्रकार सिलोर निवासी 28 वर्षीय वर्षा सेन पत्नी हनुमान सेन का भी बुधवार ऑपरेशन हुआ था, उसे भी कोटा रैफर किया गया जहां इलाज के दौरान वर्षा ने भी दम तोड़ दिया। मृतका वर्षा सेन के पति हनुमान प्रसाद सेन ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का एक महिला चिकित्सक के यहां इलाज चल रहा था। महिला चिकित्सक ने 15 सितंबर को वर्षा को जिला अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए भेजा था। अगले दिन 16 सितंबर को जिला अस्पताल में वर्षा की सिजेरियन डिलीवरी कराई गई. हनुमान प्रसाद सेन ने बताया कि ऑपरेशन के करीब दो घंटे बाद भी वर्षा को यूरिन नहीं आने पर महिला चिकित्सक और अस्पताल स्टाफ को बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार जानकारी देने के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। हनुमान प्रसाद सेन ने बताया कि कई घंटे गुजरने के बाद भी यूरिन नहीं आया और धीरे-धीरे वर्षा की तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रशासन ने उसे आनन-फानन में कोटा रेफर कर दिया। कोटा के निजी अस्पताल में देर रात इलाज के दौरान वर्षा की मौत हो गई।

गुरुवार को रेफर जीनत कि हालत गंभीर
वहीं गुरुवार सुबह भी बीती रात ऑपरेशन से डिलीवरी होने के बाद दबलाना निवासी जीनत पत्नी अलाउद्दीन को भी कोटा रैफर कर दिया गया। अलाउद्दीन ने बताया कि उसकी पत्नी के ब्लडिंग अधिक हो रही थी। इस कारण सुबह कोटा रैफर किया गया है, जीनत का अभी कोटा सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

जिला अस्पताल में मचा हड़कंप
लगातार दो प्रसुताओ की मौत की खबर से जिला अस्पताल में हड़कंप मच गया। मामले में जिला अस्पताल के डिप्टी कंट्रोलर डॉ गोविंद गुप्ता ने बताया कि घटना की जानकारी अस्पताल प्रशासन के सामने आई है। उनके अनुसार प्रसूता की सिजेरियन डिलीवरी के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे कोटा रेफर किया गया था। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। जांच में यदि इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जेके लोन अस्पताल कोटा की अधीक्षक डॉ निर्मला शर्मा का कहना है कि उनके यहां पर सुबह 6 बजे एक मरीज जीनत आई थी, जिसका इलाज चल रहा है। इसकी बूंदी में सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। उसका गंभीर हालत में इलाज चल रहा है। जबकि कोटा के निजी अस्पताल के निदेशक डॉ आरके अग्रवाल ने बताया कि बूंदी से कविता कुमावत सिजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ने से बुधवार को उनके अस्पताल पहुंची थी। जब वह अस्पताल पहुंची, तो तब पहले से ही गंभीर थी जहां पर बुधवार देर रात को उसकी मौत हो गई थी।

प्रदर्शन कर ग्रामीण और परिजनों ने की कार्यवाही की मांग
मृतक प्रसूता कविता कुमावत का उसके पीहर इंद्रगढ़ के रसूलपुरा में गुरुवार सुबह अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि वर्षा के आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने शव सड़क पर रख प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन आक्रोशित परिजन मामले में कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। परिजनों ने महिला चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई के साथ मृतका के परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग की है । ग्रामीण राधेश्याम मीणा ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रसूताओं के इलाज में लगातार लापरवाही की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि कुछ चिकित्सक अपने निजी अस्पतालों के चक्कर में जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की पर्याप्त निगरानी नहीं करते। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी चिकित्सक और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।